नमस्कार दोस्तों मै अमित कठेरिया , https://katheriyadhanuksamaj.blogspot.in/ ब्लॉग पर आने के लिये बहुत- बहुत शुक्रिया , दोस्तों मै धानुक समाज के बारे में रोचक व नई-नई जानकारी हिन्दी मे उपलब्ध कराता हूँ आपका अमित कठेरिया
शनिवार, 19 अगस्त 2017
रामायण काल में धानुक समाज की स्थिति--
1. आर्यों का मुख्य शस्त्र धनुषबाण था। भगवान रामचन्र्द धनुष चलाने में सिध्दहस्त थे। इसलिये उन्हें वीर धनुर्धारी भी कहा गया है।
2. अयोध्या की एक व्यवसायिक जाति धनुषधारी थी। जिसका कार्य युद्ध भूमि में लड़ना एवं किलों की रक्षा करना था।
3. भगवान शिव धानुकों के भगवान हैं क्योंकि उन्होंने सर्वप्रथम धनुषबाण राजा पृथु, राजा धनक आदि को प्रदान कैया था।
3. ऋग्वेद में उल्लेख है कि धानक आदिवासी जाती थी
महाभारत काल
1. युद्ध मूमि में लड़ने वाले धानका कहलाते थे।
2. महाभारत काल में एकलव्य एवं गुरू द्रोणाचार्य की कहानी प्राप्त होती है, जो कि धनुष विद्धा के ज्ञाता थे।
3. दुर्योधन ने धनुर्धारियों की एक विशाल सेना बनाई थी।(जिन्हें धनुर्धर कहा जाता थाय) महाभारत काल मे धानुक जाति के दो ऋषि हुए हैं:- उपारिचारा, एवं मेधाविक ।
तैतरेय संहिता में उल्लेख किया गया है कि समाज में धनुकारों एवं इषुकारों का एक पृथक वर्ग था जिसका कार्य धनुष बान का निर्माण करना था । इसि धनुकार शब्द का अपभ्रंश होकर धानुक शब्द बना, जिसका अर्थ है धनुष बनाना वाले।
AMIT KATHERIYA
1. आर्यों का मुख्य शस्त्र धनुषबाण था। भगवान रामचन्र्द धनुष चलाने में सिध्दहस्त थे। इसलिये उन्हें वीर धनुर्धारी भी कहा गया है।
2. अयोध्या की एक व्यवसायिक जाति धनुषधारी थी। जिसका कार्य युद्ध भूमि में लड़ना एवं किलों की रक्षा करना था।
3. भगवान शिव धानुकों के भगवान हैं क्योंकि उन्होंने सर्वप्रथम धनुषबाण राजा पृथु, राजा धनक आदि को प्रदान कैया था।
3. ऋग्वेद में उल्लेख है कि धानक आदिवासी जाती थी
महाभारत काल
1. युद्ध मूमि में लड़ने वाले धानका कहलाते थे।
2. महाभारत काल में एकलव्य एवं गुरू द्रोणाचार्य की कहानी प्राप्त होती है, जो कि धनुष विद्धा के ज्ञाता थे।
3. दुर्योधन ने धनुर्धारियों की एक विशाल सेना बनाई थी।(जिन्हें धनुर्धर कहा जाता थाय) महाभारत काल मे धानुक जाति के दो ऋषि हुए हैं:- उपारिचारा, एवं मेधाविक ।
तैतरेय संहिता में उल्लेख किया गया है कि समाज में धनुकारों एवं इषुकारों का एक पृथक वर्ग था जिसका कार्य धनुष बान का निर्माण करना था । इसि धनुकार शब्द का अपभ्रंश होकर धानुक शब्द बना, जिसका अर्थ है धनुष बनाना वाले।
गुरुवार, 17 अगस्त 2017
कठेरिया धानुक समाज: SOME PICTURE COLLECTION OF AMIT KATHERIYA ...
कठेरिया धानुक समाज: SOME PICTURE COLLECTION OF AMIT KATHERIYA ...: SOME PICTURE COLLECTION OF AMIT KATHERIYA ...........
रविवार, 6 अगस्त 2017
बी.पी. मंडल ( ओबीसी मसीहा )...... बीपी मंडल का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी में 25 अगस्त 1918 को उस समय
हुआ था जब उनके पिता स्वतंत्रता सेनानी रास बिहारी लाल मंडल जिन्दगी और
मौत से जूझ रहे थे। उनके जन्म के बाद 26 अगस्त 1918 को उनके पिता का निधन
हो गया। बीपी मंडल ने आजीवन समाजिक न्याय के लिए काम किया। 47 दिनों तक
बिहार के मुख्यमंत्री रहकर जिस तरह से उन्होंने शासन और प्रशासन के सफल
संचालन में अपनी भूमिका निभाई, वह इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षर में
दर्ज है। उनके भाई कमलेश्वरी प्रसाद मंडल भागलपुर के एमएलसी थे। उनके निधन
के बाद वह भागलपुर से जिला परिषद सदस्य बनकर राजनीतिक जीवन में प्रवेश किए
और इसके बाद सांसद, विधायक तथा मुख्यमंत्री बन कर समाज की सेवा की। 1977
में केंद्र में पहली बार जनता पार्टी की सरकार सत्ता में आई, तब उसने 1
जनवरी, 1979 को बिन्देश्वरी प्रसाद मंडल के के नेतृत्व में पिछड़ा आयोग
(अनुच्छेद 340 के तहत ) गठन किया। आयोग के अन्य सदस्यों को हमें याद करने
चाहिए। एल .आर . नायक , दीवान मोहन लाल, न्याय मूर्ति आर.आर. भोला तथा के.
सुब्रहान्यम। अध्यक्ष समेत सभी लोग ओबीसी वर्ग से ही थे। फिर तत्कालीन
मोरारजी देसाई की सरकार ने 20 दिसंबर, 1978 को को मंडल के नेतृत्व बीपी
मंडल के नेतृत्व में “पिछड़ा वर्ग आयोग” गठित करने की घोषणा संसद में कर दी |
इस आयोग की विज्ञप्ति 1 जनवरी, 1979 को जारी की गयी थी। आयोग ने सरकार को
अपनी रिपोर्ट 31 दिसम्बर 1980 को दी। जिसे राष्ट्रपति द्वारा अनुमोदन किया
गया। सरकार ने 30 अप्रैल, 1982 को संसद के पटल पर रखा गया पर एक बार फिर
जातिवादी लाभ के कारण यह सब कार्य 10 वर्ष तक ठन्डे बस्ते में डाल दिया
गया। लेकिन अंततः 1989 में आजाद भारत की सबसे बड़ी सामाजिक न्याय की सरकार
1989 में केन्द्र में वीपीसिंह की सरकार बनी। 1990 में डॉ. बाबासाहेब के
जन्म शताब्दी वर्ष को वीपी सिंह सरकार ने सामाजिक न्याय वर्ष घोषित किया।
इसी वर्ष में देश की 52 % ओबीसी जातियों के लिए मंडल आयोग रिपोर्ट लागु
करनेका संकल्प किया। डॉ बाबासाहेब आंबेडकर को भारत रत्न दिया गया, बाबा
साहेब के ग्रंथो को देश की प्रमुख भाषाओं में प्रकाशित करने के लिए करोडो
रु. का प्रावधान किया गया और डॉ. बाबासाहेब की तस्वीर संसद भवन में रखी
गयी। साथ ही नेलशन मंडेला को भी भारत रत्न से नवाजा गया।
देश की 52 % ओबीसी जातियो के लिए वीपी सिंह सरकार ने 7 सितम्बर 1990 के दिन
संवैधानिक 27 % मंडल आरक्षण केंद्रिय नौकरियो में लागु करने की घोषणा की
गयी।
आखिर 1950 से 1977 तक की दुरी क्यों तय की गई ? देश के 60 फीसदी लोगो के
हक को क्यों मारा गया ? देश को विकास से क्यों रोका गया ? फिर 1977 से
1990 का गैप क्यों हुआ ? इन तेरह सालो में सरकार ने मंडल कमीशन को लागू
करने की जरुरत क्यों नहीं समझी ? हालाँकि मेरे इस उपरोक्त सवाल के जवाब
बहुत सरल है ,लेकिन कोई देना नहीं चाहेगा। आखिर यह देश के विकास का मामला
जो ठहरा। आज भी 27 फीसदी आरक्षण के बाद सरकारी नौकरियों में ओबीसी का
प्रतिनिधित्व मात्र 12 फीसदी है। अब यह क्यों है ? कैसे है ? समझ में नहीं
आता। समझ में इसलिए नहीं आता कि इस देश का ओबीसी वर्ग समझना नहीं चाहता।........................AMIT KATHERIYA
शुक्रवार, 4 अगस्त 2017
सिविल सेवा....... ..... 1. लोग तुम्हारे स्भाविमान की परवाह नहीं करते हैं इसीलिए पहले खुद को साबित करके दिखाओ।
2. जीवन में हर कार्य शॉर्टकट से नहीं किया जा सकता है हर कार्य में जितनी उर्जा की आवश्यकता पड़ती है उतनी उर्जा तो आपको खर्च करनी ही चाहिए तभी कार्य पूर्ण तरीके से हो पाएगा ।
3. पढ़ाई पूरी करने के बाद पांच आंकड़े वाली पगार के बारे में मत सोचो एक रात में कोई वाईस प्रेसिडेंट (Vice President ) नहीं बन जाता इसके लिए मेहनत करनी पडती है।
2. जीवन में हर कार्य शॉर्टकट से नहीं किया जा सकता है हर कार्य में जितनी उर्जा की आवश्यकता पड़ती है उतनी उर्जा तो आपको खर्च करनी ही चाहिए तभी कार्य पूर्ण तरीके से हो पाएगा ।
3. पढ़ाई पूरी करने के बाद पांच आंकड़े वाली पगार के बारे में मत सोचो एक रात में कोई वाईस प्रेसिडेंट (Vice President ) नहीं बन जाता इसके लिए मेहनत करनी पडती है।
4. अभी तो आपको अपने अध्यापक सख्त और डरावने (Scary) लगते होंगे क्योंकि अभी तक आपके जीवन में बॉस नामक प्राणी से पाला नहीं पड़ा।
5. बड़ी सफ़लता हासिल करने के लिए आपको कभी -कभार रिस्क (Risk) भी लेना पड़ता है।
6. पहचान से मिला काम थोड़े समय के लिए होता है परन्तु काम से मिली पहचान उम्रभर रहती है ।
7. अगर आप गरीब जन्मे हैं तो यह आपकी गलती नहीं है और यदि आप गरीब रहकर मरते हैं तो यह आपकी गलती है।
8.हर इंसान को अपनी सफ़लता की खुशी जरूर मनानी चाहिए परन्तु इससे ज्यादा जरूरी है के उसे अपनी असफलता से सीख भी लेनी चाहिए।
9.तुम्हारी गलती केवल तुम्हारी ही गलती होगी तुम्हारी हार ही सिर्फ तुम्हारी हार है किसी को दोष देने की बजाय अपनी गलती को सुधारों और आगे बड़ो।
10. जीवन उतार -चढ़ाव (Fluctuate) से इतना भरा हुआ है के आपको इसकी आदत डालनी होगी।
11. जीवन के स्कूल में कक्षाएं नहीं होती यहां आपको हफ्ते या महीने भर की छुट्टी भी नहीं होती आपको सिखाने के लिए कोई समय भी नहीं देता यह सब आपको अपने -आप करना पड़ता है ।
12.लगातार पढ़ाई करने वाले और सख्त मेहनत करने वाले अपने दोस्तों को मत चिढाओ क्योंकि एक वक्त ऐसा आएगा के आपको उनके नीचे काम करने पड़ेगा । ...... AMIT KATHERIYA
5. बड़ी सफ़लता हासिल करने के लिए आपको कभी -कभार रिस्क (Risk) भी लेना पड़ता है।
6. पहचान से मिला काम थोड़े समय के लिए होता है परन्तु काम से मिली पहचान उम्रभर रहती है ।
7. अगर आप गरीब जन्मे हैं तो यह आपकी गलती नहीं है और यदि आप गरीब रहकर मरते हैं तो यह आपकी गलती है।
8.हर इंसान को अपनी सफ़लता की खुशी जरूर मनानी चाहिए परन्तु इससे ज्यादा जरूरी है के उसे अपनी असफलता से सीख भी लेनी चाहिए।
9.तुम्हारी गलती केवल तुम्हारी ही गलती होगी तुम्हारी हार ही सिर्फ तुम्हारी हार है किसी को दोष देने की बजाय अपनी गलती को सुधारों और आगे बड़ो।
10. जीवन उतार -चढ़ाव (Fluctuate) से इतना भरा हुआ है के आपको इसकी आदत डालनी होगी।
11. जीवन के स्कूल में कक्षाएं नहीं होती यहां आपको हफ्ते या महीने भर की छुट्टी भी नहीं होती आपको सिखाने के लिए कोई समय भी नहीं देता यह सब आपको अपने -आप करना पड़ता है ।
12.लगातार पढ़ाई करने वाले और सख्त मेहनत करने वाले अपने दोस्तों को मत चिढाओ क्योंकि एक वक्त ऐसा आएगा के आपको उनके नीचे काम करने पड़ेगा । ...... AMIT KATHERIYA
सिविल सर्विसेज की तैयारी के शुरूआत में कुछ चीजें याद रखे
*************
1. कम पढ़े ,,,उसका ज्यादा समय तक विश्लेषण करें ,,ओर उससे भी ज्यादा जब भी समय मिले तब कुछ न कुछ लिखे ,,चाहे किसी विषय पर स्वयम के मौलिक विचार ही क्यों न लिखना पड़े।
2. Revision को सबसे बड़ा नियम बना ले ,,, revision की जरूरत इसलिए भी है कि अच्छा revision आपको आने वाले चैप्टर्स को समझने में सहायता करता है ।
3.कुछ बेसिक्स बुक्स को ही ज्यादा से ज्यादा पढ़े ,,तैयारी के सुरुआत में फालतू की नेट पर दी गयी पीडीएफ ,,नोट्स ,ट्रिक्स ,में अपने आपको न उलझाए
4. किसी भी परीक्षा को पास करने के कुछ मापदंड होते है ।उन्हें ध्यान रखे ,ओर उन्हें प्राप्त करने की कोशिश करे ।जैसे psc के नए पैटर्न में मैन्स एग्जाम के 3 मापदण्ड ये है ,जिनके बिना सिलेक्शन नही होना -
a. पूरा पेपर अटेम्प करना ,,इसके लिए लिखने की रफ्तार तेज होनी चाहिए।
b. अधिकतम चीजो की समझ ,,ओर कुछ चीजो के लिए बेहतर स्मरण शक्ति
c. नैतिकता और निबंन्ध वाले पेपर में मौलिक प्रदर्सन करने की क्षमता का होना।
5. एक बार कोई नोट्स ,बुक्स को सेलेक्ट कर लो ,,फिर पूरी तरह से उस अध्ययन सामग्री पर विशवास करके पढो ,की हमे सफलता इसी मटेरियल से मिल जाएगी।
6. सफल ,असफल सभी अनुभवी लोगो के द्रष्टिकोण को खुले मन से सुने ,,लेकिन अपनी सुविधानुसार ,विवेकानुसार ही उनकी रणनीति के पहलुओं का चुनाव अपनी परिस्थिति के अनुसार करे। 100% किसी को फॉलो न करे ।
7. पूरी सिविल सर्विसेज की तैयारी की समय सीमा 1 साल से ज्यादा न मानके चले। ये सही है कि सफल होने वाले अधिकतम लोग कुछ साल के बाद ही इसमें सेलेक्ट होते है। लेकिन इसका ये मतलब नही की उनकी तैयारी पहले पूरी नही थी ।। इसलिए आप 1 साल को पर्याप्त मानकर चल ,सम्पूर्ण syallabs के अध्ययन के लिए।
8. पूरी तैयारी के दौरान सामान्य व्यक्ति की तरह व्यबहार करे। न परिवार,समाज ,मित्रो में ये भोकाल बनाये की आप सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे है ,इसलिए आप पर बिल्कुल भी समय नही है।
9. खुद के लिए पढ़ने के अतिरिक्त रोज 1-2 घंटे निकाले। इसमें वो सब काम करे जो आपको अच्छा लगता है। खेलो ,फ़िल्म देखो ,दोस्तो से गप्प मारो ,,परिवार वालो को समय दो।
10. बड़े लक्ष्य निर्धारित करे। ओर उनको प्राप्त करने की कोशिश करे। .............. AMIT KATHERIYA
सिविल सेवा .....किसके लिए कितनी आसान....!!!
*************
1...पढ़ने में गहन रुचि....अगर आप 2-3घन्टे तक एक जगह
बैठकर किताबों के साथ डूबे रह सकते हो...,जैसे एक
गुदगुदाने वाले उपन्यास को पढ़ते समय पता ही नहीं
चलता ,कब दो से तीन घंटे बीत गए अथार्त पढ़ाई को
एन्जाय करते हो ।
2...निरन्तरता का कोई जबाव नहीं....... हर रोज़
पढने की ललक .........चाहें पांच छह घंटे ही
पढ़े,क्योंकि सप्ताह में चार दिन पंद्रह-पंद्रह घंटे पढ़कर
,तीन दिन मौजमस्ती करने से अच्छा है,सप्ताह के
सातों दिन आठ आठ घंटे पढ़ना ....
3..." करेंट अफेयर पर तगड़ी पकड़ .......सिविल सेवा
की तैयारी 70 फीसदी डैली के न्यूजपेपर से होती हैं
.....इसलिए खुद को हर दिन देश- दुनिया की खबरों व
घटनाओं के प्रति alert रखता हो ,न्यूजपेपर को
किताब की तरह पढ़ता हो..., लेकिन चुनिंदा खबरों
तथा लेखों को ही.....
4......तैयारी के शुरुआती चार महीनों में हर रोज़ आधा
घंटा सिविल सेवा के सिलेबस को समझने में
लगाइये,उसके पश्चात् अगले चार महीने हर रोज़ आधा
घंटा आईएएस के पुराने पेपरों को समझने में लगाइये
.....यह याद रखिए अगर आपने सिलेबस तथा पुराने
पेपरों को नहीं समझा,तो आपने upsc के बारे में कुछ
भी नहीं समझा,क्योंकि यही आपकी गीता हैं,यही
आपकी कुरान हैं .......
5....6-12 Ncert किताबों का खुद को विशेषज्ञ
बना ले...
कुछ चुनिंदा विषयों का
6.....सबसे अन्त में सबसे जरूरी भी एक वैकल्पिक कैरियर
दिमाग में रखिए,ताकि आगे चलकर ज्यादा हाथ -
पाव ना मारना पड़े (अधिकतर लोग हल्के में लेते
हैं)....... AMIT KATHERIYA
गुदगुदाने वाले उपन्यास को पढ़ते समय पता ही नहीं
चलता ,कब दो से तीन घंटे बीत गए अथार्त पढ़ाई को
एन्जाय करते हो ।
2...निरन्तरता का कोई जबाव नहीं....... हर रोज़
पढने की ललक .........चाहें पांच छह घंटे ही
पढ़े,क्योंकि सप्ताह में चार दिन पंद्रह-पंद्रह घंटे पढ़कर
,तीन दिन मौजमस्ती करने से अच्छा है,सप्ताह के
सातों दिन आठ आठ घंटे पढ़ना ....
3..." करेंट अफेयर पर तगड़ी पकड़ .......सिविल सेवा
की तैयारी 70 फीसदी डैली के न्यूजपेपर से होती हैं
.....इसलिए खुद को हर दिन देश- दुनिया की खबरों व
घटनाओं के प्रति alert रखता हो ,न्यूजपेपर को
किताब की तरह पढ़ता हो..., लेकिन चुनिंदा खबरों
तथा लेखों को ही.....
4......तैयारी के शुरुआती चार महीनों में हर रोज़ आधा
घंटा सिविल सेवा के सिलेबस को समझने में
लगाइये,उसके पश्चात् अगले चार महीने हर रोज़ आधा
घंटा आईएएस के पुराने पेपरों को समझने में लगाइये
.....यह याद रखिए अगर आपने सिलेबस तथा पुराने
पेपरों को नहीं समझा,तो आपने upsc के बारे में कुछ
भी नहीं समझा,क्योंकि यही आपकी गीता हैं,यही
आपकी कुरान हैं .......
5....6-12 Ncert किताबों का खुद को विशेषज्ञ
बना ले...
कुछ चुनिंदा विषयों का
6.....सबसे अन्त में सबसे जरूरी भी एक वैकल्पिक कैरियर
दिमाग में रखिए,ताकि आगे चलकर ज्यादा हाथ -
पाव ना मारना पड़े (अधिकतर लोग हल्के में लेते
हैं)....... AMIT KATHERIYA
लक्ष्य के सात चक्रव्यूह :
1. हमें असफलता कभी नहीं तोड़ती, हम टूटते हैं अनियमितता (Irregularity) से।
इसलिए अपने अध्ययन में नियमितता लायें।छह घंटा ही पढें लेकिन नियमित पढें।
.
2. हम प्रतियोगिता से कठिन प्रश्न गलत करके कभी बाहर नहीं होते, हम बाहर तब होते हैं जब आसान से प्रश्न को गलत कर देते हैं। इसलिए अति विशेष के चक्कर में सामान्य चीजों को नजरअंदाज ना करें। सामान्य जानकारियों को भी अवश्य दुहरा लें।
.
3.जैसे-जैसे आपके समर्पित लक्ष्य नजदीक आतें हैं आपकी इंद्रियां अति संवेदनशील होती जाती है। सामान्य समय में बड़ी बातों को हँस कर टालने वाला व्यक्ति भी परीक्षा के संक्रमण समय में छोटी-छोटी बातों से विचलित हो जाता है। इसलिए जब आप लक्ष्य के नजदीक हों तो कम बोलिए, जरुरत पड़ने पर ही बाहर निकलिए, कम से कम सामाजिक गतिविधियों में भाग लिजिए।
.
4. मानसिक थकान/तनाव दूर करने का उपाय जरूर निकालिए, क्योंकि यह बहुत जल्द आपको बीमार कर देती हैं। इसलिए परीक्षा संक्रमण के दौरान पर्याप्त नींद, पूर्ण एवं पौष्टिक आहार, व्यायाम/योगा अवश्य करें। अन्यथा आपके वर्षों की मेहनत पर पानी फिर सकता है।
.
5. विगत वर्षों में पूछे गये प्रश्नों को भी देंख लें। इससे अपने तैयारी का स्तर, पूछे जाने वाले प्रश्नों की प्रकृति, बदलते ट्रेंड के बारे में पता चलता है। साथ ही साथ आत्मविश्वास बढ़ता है।
.
6. कई पुस्तक/नोट्स पढने के वजाय कोई एक ही अच्छी पुस्तक/नोट्स बार-बार पढें।
.
7. हर जीत का एक ही मनोविज्ञान है, वह है आपके जीत का जज्बा/हौसला। ज्यों ही आप हताश/निराश होतें हैं अपनी जंग हार जाते हैं। इसका एक ही उपाय है अपने लक्ष्य पाने का निरंतर चिंतन और उस दिशा में सार्थक प्रयास ।.................. AMIT KATHERIYA
IAS टॉपरों के शीर्ष 8 सामान्य गुण: ...
IAS टॉपर्स को अक्सर हमारे समाज में आदर्श माना जाता है क्योंकि उन्होंने
देश की सबसे मुश्किल परीक्षा में सफ़लता पाई है। IAS टॉपर दूसरे क्षेत्र के
टॉपरों की तरह ही पहले एक अच्छा छात्र बनता है और फिर एक टॉपर बन पाता है।
इन व्यक्तियों के गुणों का विश्लेषण करना महत्वपूर्ण है।
यहां इस लेख में हमने 8 अद्वितीय गुणों को समझने की कोशिश की है जो IAS टॉपरों में आम हैं।
1. अनुशासन और इच्छा शक्ति:
सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण अनुशासन जो कि लंबी अवधि में सफलता प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम गुणवत्ता है। किसी भी अन्य निष्ठावान छात्र जैसे IAS टॉपर्स अपने अध्ययन के दौरान समय और ऊर्जा के महत्व को समझते हैं इसलिए वे अपने अध्ययन समय सारणी तथा अन्य दैनिक क्रिया में समय बिताने के बारे में बेहद अनुशासित होते हैं। अनुशासन का यह अर्थ है कि इच्छा शक्ति से जीवन के हर मोड़ में सफ़लता प्राप्त होगी और यह अनुशासन की शुरुआत एक उचित अध्ययन टाइम-टेबल को बनाए रखने से ही संभव होग सकता है। इच्छा-शक्ति की ही आवश्यकता केवल लंबे समय तक अभ्यास करने के लिए ही नहीं होती है बल्कि जब उम्मीदवार जीवन में हताश हो तो यही इच्छा-शक्ति अभ्यास को फिर से शुरू करने की एक नई ऊर्जा प्रदान करता है।
2. समर्पण और संगतता:
IAS टॉपर और असफल IAS उम्मीदवार के बीच बुनियादी अंतर समर्पण और निरंतरता का है जो अभ्यास के साथ आता है। नई चीजें सीखने के लिए समर्पित होने और सीखने के तरीके में लगातार सुधार लाने के लिए एक कला की आवशकता है जो IAS उम्मीदवारों द्वारा अध्ययन के लिए एक सख्त टाइम-टेबल के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है। IAS में टॉप करने वाले छात्रों में अध्ययन की नियमितता में स्थिरता के महत्व का एहसास होता है और हर दिन संशोधन करने के लिए समय अवश्य निकालते हैं।
3. कभी हार ना मानने का रवैया:
IAS टॉपरों के पास कभी हार ना मानने का रवैया होता है जो उन्हें IAS परीक्षा की पूरी प्रक्रिया मंम प्रेरित करता रहता है। जब किसी व्यक्ति में कभी कभी हार ना मानने का रवैया नहीं होता है तब वे आसानी से हार मान लेता है और ऐसी परिस्थिति IAS परीक्षा की तैयारी के दौरान बहुत घातक सिद्ध हो सकता है। IAS उम्मीदवारों को इस तरह के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रूप से ढल जाना चाहिए क्योंकि सिविल सर्विस सभी के लिए जीवन परिवर्तक हैं और इससे उन्हें IAS परीक्षा से जुड़े जोखिमों का एहसास करने में मदद मिलेगी।
4. चिंतनशील सोच:
सिविल सर्विस के लिए अध्ययन की प्रक्रिया के दौरान IAS टॉपरों की एक चिंतनशील सोच विकसित होती है जो उन्हें समस्या की स्थिति में आगे बढ़ने की कल्पना करने में मदद करती है। विश्लेषणात्मक तर्क का कौशल भी IAS परीक्षा देने के दौरान कुछ अलग सोचने में मदद करता है। ऐसी दूरदर्शी सोच अन्य उम्मीदवारों से IAS टॉपरों के उत्तर को अलग करती है क्योंकि इसमें छात्रों के बहुमत की तुलना में एक अनूठा समाधान होता हैं।
5. आत्मविश्वास और आत्म-सौष्ठव
जैसा कि गांधीजी ने कहा है की - "ज्ञान ही शक्ति है", अगर हर छात्र सीखता रहता है तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। IAS टॉपरों के पास एक मजबूत विश्वास प्रणाली है जो उनके IAS की तैयारी में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए निरंतर प्रेरणा शक्ति की तरह काम करती है। सभी IAS उमीद्वारो को भी अपने IAS सिलेबस को समय में पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए ताकि संशोधन के लिए उनके पास पर्याप्त समय शेष हो।
6. स्पष्ट लक्ष्यों और संगठनात्मक कौशल:
IAS टॉपर्स हमेशा जीवन के रास्ते में एक परिप्रेक्ष्य रखते हैं। वे जानते हैं कि मन में स्पष्टता IAS परीक्षा लिखने के दौरान बहुत महत्वपूर्ण है जो परीक्षा की प्रक्रिया में स्पष्टता को दर्शाता है। लक्ष्य, चाहे अल्पावधि या दीर्घकालिक स्पष्ट होन चाहिए क्योंकि योजनाबद्ध लक्ष्य IAS टॉपरों को उनकी योग्यता के अनुसार अपनी पढ़ाई आयोजित करने में सहायता करता हैं। अध्ययन सामग्री को व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जा सकता है और अगर IAS उम्मीदवारों ने IAS परीक्षा में परिप्रेक्ष्य प्राप्त किया हो तो सफ़लता प्राप्त की जा सकती है।
7. काम के लिए सम्मान:
"कार्य पूजा है"यह वाक्य वास्तव में एक IAS टोपर पर लागू होता है वह हमेशा यह महसूस करता है कि कार्य शब्द परिस्थितियों के लिए व्यक्ति-परक हैं जैसे जब वे IAS उम्मीदवार हैं, उनका काम अध्ययन करना है और जब वे IAS अधिकारी बन जाते हैं, तो उनका काम एक अच्छा प्रशासक बनना होता है। इसी तरह वह अपने काम का सम्मान करते है; वे ईमानदारी से समय समय पर आने वाली समस्याओं को हल करने में प्राप्त ज्ञान को लागू करने की कोशिश करते हैं।
8. आत्म निरीक्षण:
IAS टॉपरों को एहसास है कि कोई भी जीवन में परिपूर्ण नहीं हो सकता है और हर किसी की IAS तैयारी में सुधार के लिए जगह है ताकि वे अपने शिक्षण का समीक्षिक विश्लेषण करके अपनी रणनीति में सुधार कर सकें। IAS टॉपरों को पता है कि परीक्षा में किस तरह की जरूरत है आत्मनिरीक्षण सिर्फ एक नैतिक अभ्यास नहीं है; यह जीने के प्रत्येक चरण में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा सकता है (एक छात्र के रूप में भी) ।
निष्कर्ष:
IAS टॉपर हमेशा देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत रहे हैं। इसके अलावा, इन गुणों को अगर छात्रों द्वारा अपनाये जाए तो जीवन में सफल होने के लिए उनकी यात्रा में बड़ा अंतर आ सकता है। टॉपर बनना हर किसी का सपना है, लेकिन IAS उम्मीदवारों को याद रखना चाहिए कि बड़ा सपना बड़ा प्रयास मांगता है। ......... AMIT KATHERIYA
यहां इस लेख में हमने 8 अद्वितीय गुणों को समझने की कोशिश की है जो IAS टॉपरों में आम हैं।
1. अनुशासन और इच्छा शक्ति:
सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण अनुशासन जो कि लंबी अवधि में सफलता प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम गुणवत्ता है। किसी भी अन्य निष्ठावान छात्र जैसे IAS टॉपर्स अपने अध्ययन के दौरान समय और ऊर्जा के महत्व को समझते हैं इसलिए वे अपने अध्ययन समय सारणी तथा अन्य दैनिक क्रिया में समय बिताने के बारे में बेहद अनुशासित होते हैं। अनुशासन का यह अर्थ है कि इच्छा शक्ति से जीवन के हर मोड़ में सफ़लता प्राप्त होगी और यह अनुशासन की शुरुआत एक उचित अध्ययन टाइम-टेबल को बनाए रखने से ही संभव होग सकता है। इच्छा-शक्ति की ही आवश्यकता केवल लंबे समय तक अभ्यास करने के लिए ही नहीं होती है बल्कि जब उम्मीदवार जीवन में हताश हो तो यही इच्छा-शक्ति अभ्यास को फिर से शुरू करने की एक नई ऊर्जा प्रदान करता है।
2. समर्पण और संगतता:
IAS टॉपर और असफल IAS उम्मीदवार के बीच बुनियादी अंतर समर्पण और निरंतरता का है जो अभ्यास के साथ आता है। नई चीजें सीखने के लिए समर्पित होने और सीखने के तरीके में लगातार सुधार लाने के लिए एक कला की आवशकता है जो IAS उम्मीदवारों द्वारा अध्ययन के लिए एक सख्त टाइम-टेबल के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है। IAS में टॉप करने वाले छात्रों में अध्ययन की नियमितता में स्थिरता के महत्व का एहसास होता है और हर दिन संशोधन करने के लिए समय अवश्य निकालते हैं।
3. कभी हार ना मानने का रवैया:
IAS टॉपरों के पास कभी हार ना मानने का रवैया होता है जो उन्हें IAS परीक्षा की पूरी प्रक्रिया मंम प्रेरित करता रहता है। जब किसी व्यक्ति में कभी कभी हार ना मानने का रवैया नहीं होता है तब वे आसानी से हार मान लेता है और ऐसी परिस्थिति IAS परीक्षा की तैयारी के दौरान बहुत घातक सिद्ध हो सकता है। IAS उम्मीदवारों को इस तरह के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रूप से ढल जाना चाहिए क्योंकि सिविल सर्विस सभी के लिए जीवन परिवर्तक हैं और इससे उन्हें IAS परीक्षा से जुड़े जोखिमों का एहसास करने में मदद मिलेगी।
4. चिंतनशील सोच:
सिविल सर्विस के लिए अध्ययन की प्रक्रिया के दौरान IAS टॉपरों की एक चिंतनशील सोच विकसित होती है जो उन्हें समस्या की स्थिति में आगे बढ़ने की कल्पना करने में मदद करती है। विश्लेषणात्मक तर्क का कौशल भी IAS परीक्षा देने के दौरान कुछ अलग सोचने में मदद करता है। ऐसी दूरदर्शी सोच अन्य उम्मीदवारों से IAS टॉपरों के उत्तर को अलग करती है क्योंकि इसमें छात्रों के बहुमत की तुलना में एक अनूठा समाधान होता हैं।
5. आत्मविश्वास और आत्म-सौष्ठव
जैसा कि गांधीजी ने कहा है की - "ज्ञान ही शक्ति है", अगर हर छात्र सीखता रहता है तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। IAS टॉपरों के पास एक मजबूत विश्वास प्रणाली है जो उनके IAS की तैयारी में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए निरंतर प्रेरणा शक्ति की तरह काम करती है। सभी IAS उमीद्वारो को भी अपने IAS सिलेबस को समय में पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए ताकि संशोधन के लिए उनके पास पर्याप्त समय शेष हो।
6. स्पष्ट लक्ष्यों और संगठनात्मक कौशल:
IAS टॉपर्स हमेशा जीवन के रास्ते में एक परिप्रेक्ष्य रखते हैं। वे जानते हैं कि मन में स्पष्टता IAS परीक्षा लिखने के दौरान बहुत महत्वपूर्ण है जो परीक्षा की प्रक्रिया में स्पष्टता को दर्शाता है। लक्ष्य, चाहे अल्पावधि या दीर्घकालिक स्पष्ट होन चाहिए क्योंकि योजनाबद्ध लक्ष्य IAS टॉपरों को उनकी योग्यता के अनुसार अपनी पढ़ाई आयोजित करने में सहायता करता हैं। अध्ययन सामग्री को व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जा सकता है और अगर IAS उम्मीदवारों ने IAS परीक्षा में परिप्रेक्ष्य प्राप्त किया हो तो सफ़लता प्राप्त की जा सकती है।
7. काम के लिए सम्मान:
"कार्य पूजा है"यह वाक्य वास्तव में एक IAS टोपर पर लागू होता है वह हमेशा यह महसूस करता है कि कार्य शब्द परिस्थितियों के लिए व्यक्ति-परक हैं जैसे जब वे IAS उम्मीदवार हैं, उनका काम अध्ययन करना है और जब वे IAS अधिकारी बन जाते हैं, तो उनका काम एक अच्छा प्रशासक बनना होता है। इसी तरह वह अपने काम का सम्मान करते है; वे ईमानदारी से समय समय पर आने वाली समस्याओं को हल करने में प्राप्त ज्ञान को लागू करने की कोशिश करते हैं।
8. आत्म निरीक्षण:
IAS टॉपरों को एहसास है कि कोई भी जीवन में परिपूर्ण नहीं हो सकता है और हर किसी की IAS तैयारी में सुधार के लिए जगह है ताकि वे अपने शिक्षण का समीक्षिक विश्लेषण करके अपनी रणनीति में सुधार कर सकें। IAS टॉपरों को पता है कि परीक्षा में किस तरह की जरूरत है आत्मनिरीक्षण सिर्फ एक नैतिक अभ्यास नहीं है; यह जीने के प्रत्येक चरण में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा सकता है (एक छात्र के रूप में भी) ।
निष्कर्ष:
IAS टॉपर हमेशा देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत रहे हैं। इसके अलावा, इन गुणों को अगर छात्रों द्वारा अपनाये जाए तो जीवन में सफल होने के लिए उनकी यात्रा में बड़ा अंतर आ सकता है। टॉपर बनना हर किसी का सपना है, लेकिन IAS उम्मीदवारों को याद रखना चाहिए कि बड़ा सपना बड़ा प्रयास मांगता है। ......... AMIT KATHERIYA
अगर आपका लक्ष्य सिर्फ IAS है तो.....
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एक साल की स्ट्रेटजी
आईएएस की प्रारंभिक परीक्षा की प्रीपेरेशन कब शुरू करना चाहिए ? लोग कहेंगे कि आप बचपन से, कोई पार्टिकुलर टाइम से करें ये सब उतना जरुरी नही है । आपको जब भी लगे उसमे आपकी उम्र कितने बचे हैं, कितने साल बचे हैं, कितने attempts बचे हैं, इसका ध्यान न दे । अगर आपको लगता है कि आप मेहनत कर सकते है तो ये 1 साल भी आपके लिए बहुत है । सबसे पहला एग्जाम्स प्री का होता है दूसरा एग्जाम्स मेन्स । अगर इन दोनों एग्जाम्स में क्वालीफाई हो जाये तो इंटरव्यू होता है । प्री का जो पेपर है वे दो पेपर होते हैं एक सीसेट या एप्टीटयूड और एक होता है जनरल स्टडीज । प्री में सीसेट जो है वो कवालीफाईअंग होता है उसमें 33% ही लाना अनिवार्य है उसमें ज्यादा टेंशन लेने की जरूरत नही है । पेपर जो जीएस का होता है उसका यूपीएससी एक सिलेबस निकालता है उस सिलेबस को आप देखें उसमें हिस्ट्री, ज्योग्राफी, इकोनॉमिक्स, पोलिटिकल साईंस, करेंट अफेयर्स, साइंस एंड टेक्नोलॉजी एवं सबकुछ होता है एक्चुअली कोई सिलेबस होता ही नहीं है , जो भी देश में चल रहा होता है जो जनरली वेल इनफॅरम को पता होना चाहिए वो सब इस पेपर में आते हैं । इससे घबराने की जरूरत नहीं है अगर आप सिम्पल सा प्रोसेजर फॉलो करे तो आपके इतने नंबर आ जायेंगे कि प्री में आपका सेलेक्शन हो जायेगा और प्री में अच्छा करके अच्छी रैंक से कोई ताल्लुक नहीं है । प्री सिर्फ सेलेक्शन लेवल का एग्जाम है हिस्ट्री, ज्योग्राफी, इकोनॉमिक्स पोलिटिकल साईंस सबके लिए कौन सी किताबें पढ़नी है इनमें आप स्पेक्ट्रम की मॉडर्न हिस्ट्री की किताब को बहुत इम्पोर्टेंट दे सकते है प्री के लिए ज्योग्राफी के लिए क्लास 6 से क्लास 12 तक NCERT पढ सकते है. और इधर-उधर ज्यादा जानना है तो G. C Leyong पढ सकते है लेकिन उसकी उतनी जरुरत नहीं होती है और इकोनॉमिक्स, पोलिटिकल के लिए रमेश सिंह, एम लक्ष्मीकांत तथा अगेन 11 एवं 12 तक की एनसीईआरटी तक की पुस्तक का अध्ययन कर सकते हैं जो More than enough knowledge है इसके अलावा जो करेंट इवेंट्स हैं उसके लिए कोई एक प्रमाणिक न्यूजपेपर द हिन्दू, जनसत्ता, दैनिक भास्कर पढ सकते हैं वो आप अपनी सुविधा के अनुसार पढ सकते है इसके अलावा साईंस एंड टेक्नोलॉजी और स्पेस एंड डेवलपमेंट ये जनरल बातें हैं जो आपको न्यूजपेपर के अलावा कुछ भी पढने की जरुरत नहीं है और इसमें ज्यादा टाइम वेस्ट करने की जरुरत नहीं है प्री और मेन्स की तैयारी आप साथ साथ करें दिनभर में अगर आप प्री के लिए 6 घंटे पढ रहें हैं तो मेन्स के लिए कम से कम 2 घंटे निकाल लें । प्री की वो टॉपिक ज्यादा पढें जो मेन्स में कोइनसाइड कर दे इससे आप की प्रीपेरेशन एक अच्छे लेवल तक आ जाएगी । इसके अलावा एक चीज आप कर सकते हैं प्री की तैयारी में different coaching के टेस्ट पेपर्स करना तो वो आप जरूर करें एक बार आप दिल्ली जायें प्री के दो महीने पहले और जितने भी कोचिंग सेंटर्स फेमस है उन कोचिंग सेंटर्स के टेस्ट पेपर्स ले के वो पेपर्स घर पर करें ये बहुत अच्छी प्रेक्टिस करा देता है द विजन, द इनसाइटस इनके प्रश्न मेन्स पेपर में रिपीट होते हैं, तो इसके साथ सीसेट के लिए ज्यादा टेंशन लेने की जरूरत नही है उसमें बडा ही बेसिक्स 10th Level का मैथ, इंग्लिश , थोड़ा सा समझदारी और थोड़ी सी कंम्प्रीहेअशन ये आपको आनी चाहिए ।।
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एक साल की स्ट्रेटजी
आईएएस की प्रारंभिक परीक्षा की प्रीपेरेशन कब शुरू करना चाहिए ? लोग कहेंगे कि आप बचपन से, कोई पार्टिकुलर टाइम से करें ये सब उतना जरुरी नही है । आपको जब भी लगे उसमे आपकी उम्र कितने बचे हैं, कितने साल बचे हैं, कितने attempts बचे हैं, इसका ध्यान न दे । अगर आपको लगता है कि आप मेहनत कर सकते है तो ये 1 साल भी आपके लिए बहुत है । सबसे पहला एग्जाम्स प्री का होता है दूसरा एग्जाम्स मेन्स । अगर इन दोनों एग्जाम्स में क्वालीफाई हो जाये तो इंटरव्यू होता है । प्री का जो पेपर है वे दो पेपर होते हैं एक सीसेट या एप्टीटयूड और एक होता है जनरल स्टडीज । प्री में सीसेट जो है वो कवालीफाईअंग होता है उसमें 33% ही लाना अनिवार्य है उसमें ज्यादा टेंशन लेने की जरूरत नही है । पेपर जो जीएस का होता है उसका यूपीएससी एक सिलेबस निकालता है उस सिलेबस को आप देखें उसमें हिस्ट्री, ज्योग्राफी, इकोनॉमिक्स, पोलिटिकल साईंस, करेंट अफेयर्स, साइंस एंड टेक्नोलॉजी एवं सबकुछ होता है एक्चुअली कोई सिलेबस होता ही नहीं है , जो भी देश में चल रहा होता है जो जनरली वेल इनफॅरम को पता होना चाहिए वो सब इस पेपर में आते हैं । इससे घबराने की जरूरत नहीं है अगर आप सिम्पल सा प्रोसेजर फॉलो करे तो आपके इतने नंबर आ जायेंगे कि प्री में आपका सेलेक्शन हो जायेगा और प्री में अच्छा करके अच्छी रैंक से कोई ताल्लुक नहीं है । प्री सिर्फ सेलेक्शन लेवल का एग्जाम है हिस्ट्री, ज्योग्राफी, इकोनॉमिक्स पोलिटिकल साईंस सबके लिए कौन सी किताबें पढ़नी है इनमें आप स्पेक्ट्रम की मॉडर्न हिस्ट्री की किताब को बहुत इम्पोर्टेंट दे सकते है प्री के लिए ज्योग्राफी के लिए क्लास 6 से क्लास 12 तक NCERT पढ सकते है. और इधर-उधर ज्यादा जानना है तो G. C Leyong पढ सकते है लेकिन उसकी उतनी जरुरत नहीं होती है और इकोनॉमिक्स, पोलिटिकल के लिए रमेश सिंह, एम लक्ष्मीकांत तथा अगेन 11 एवं 12 तक की एनसीईआरटी तक की पुस्तक का अध्ययन कर सकते हैं जो More than enough knowledge है इसके अलावा जो करेंट इवेंट्स हैं उसके लिए कोई एक प्रमाणिक न्यूजपेपर द हिन्दू, जनसत्ता, दैनिक भास्कर पढ सकते हैं वो आप अपनी सुविधा के अनुसार पढ सकते है इसके अलावा साईंस एंड टेक्नोलॉजी और स्पेस एंड डेवलपमेंट ये जनरल बातें हैं जो आपको न्यूजपेपर के अलावा कुछ भी पढने की जरुरत नहीं है और इसमें ज्यादा टाइम वेस्ट करने की जरुरत नहीं है प्री और मेन्स की तैयारी आप साथ साथ करें दिनभर में अगर आप प्री के लिए 6 घंटे पढ रहें हैं तो मेन्स के लिए कम से कम 2 घंटे निकाल लें । प्री की वो टॉपिक ज्यादा पढें जो मेन्स में कोइनसाइड कर दे इससे आप की प्रीपेरेशन एक अच्छे लेवल तक आ जाएगी । इसके अलावा एक चीज आप कर सकते हैं प्री की तैयारी में different coaching के टेस्ट पेपर्स करना तो वो आप जरूर करें एक बार आप दिल्ली जायें प्री के दो महीने पहले और जितने भी कोचिंग सेंटर्स फेमस है उन कोचिंग सेंटर्स के टेस्ट पेपर्स ले के वो पेपर्स घर पर करें ये बहुत अच्छी प्रेक्टिस करा देता है द विजन, द इनसाइटस इनके प्रश्न मेन्स पेपर में रिपीट होते हैं, तो इसके साथ सीसेट के लिए ज्यादा टेंशन लेने की जरूरत नही है उसमें बडा ही बेसिक्स 10th Level का मैथ, इंग्लिश , थोड़ा सा समझदारी और थोड़ी सी कंम्प्रीहेअशन ये आपको आनी चाहिए ।।
शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
राजा
धनक कि कहानी
राजा धनक के चार पुत्र थे (1)कृतवीर्य (2)कृतग्नि (3)कृतवर्मा (4)कृतौजा। इनमें से बड़े पृतवीर्य को राजगद्दी मिली शेस-3 पुत्र के बारे में धार्मिक ग्रंथ मौन है। इनके बारे में किसी भी ग्रंथ में उल्लेख प्राप्त नहीं होता है। संभवत इन तीनों राजकुमारों ने अपने पृथक् राज्य की स्थापना कर राज्य शासन चलाया कहीं-कहीं पढ़ने को मिलता है कि राजा धनक के पुत्रों ने हिमाचल तक अपने राज्य का विस्तार किया था उन तीनों युवराज का क्या हुआ क्या वह अपने भाइयों के अधीन कार्य करते थे अथवा उनको अलग से राज्य देकर दूसरे राज्य में भेज दिया गया अथवा उन्हें समाप्त कर दिया गया जैसे प्राचीन काल में प्रथा थी कि बड़े बेटे को राज गद्दी श ौप कर राजा बन प्रस्थान में चले जाते थे यह संभव है कि राजा धनक ने अपना राज्य अपने लड़के को शौपकर वन प्रस्थान में चले गए और ईश्वर की तपस्या में लीन हो गए वहां पर भगवान शंकर ने प्रसन्न होकर उन्हें शक्ति प्रदान की और वह शक्ति थी धनुष बान।
यह शक्ति राजा धनक द्वारा अपने शेष पुत्रों को दे दी गई इन पुत्रों ने अपने पिता राजा धनक के नाम पर अपना पृथक से धनक वंश चलाया किंतु वे अधिक शक्तिशाली नहीं रहे और उनके राज्य का शीघ्र पतन हो गया आतः किसी भी ग्रंथ में उनका उल्लेख नहीं मिलता है राजा जनक की राजधानी महिष्मति (महेश्वर) थी उनका राज्य विदर्भ एवं वैदेही तक फैला हुआ था। इनके राज्य में जहाजों से व्यापार होता था जो यूरोप के बाजार तक फैला हुआ था उनका रास्ता नर्मदा नदी के द्वार था। प्रस्तुतकर्ता.... अमित
राजा धनक के चार पुत्र थे (1)कृतवीर्य (2)कृतग्नि (3)कृतवर्मा (4)कृतौजा। इनमें से बड़े पृतवीर्य को राजगद्दी मिली शेस-3 पुत्र के बारे में धार्मिक ग्रंथ मौन है। इनके बारे में किसी भी ग्रंथ में उल्लेख प्राप्त नहीं होता है। संभवत इन तीनों राजकुमारों ने अपने पृथक् राज्य की स्थापना कर राज्य शासन चलाया कहीं-कहीं पढ़ने को मिलता है कि राजा धनक के पुत्रों ने हिमाचल तक अपने राज्य का विस्तार किया था उन तीनों युवराज का क्या हुआ क्या वह अपने भाइयों के अधीन कार्य करते थे अथवा उनको अलग से राज्य देकर दूसरे राज्य में भेज दिया गया अथवा उन्हें समाप्त कर दिया गया जैसे प्राचीन काल में प्रथा थी कि बड़े बेटे को राज गद्दी श ौप कर राजा बन प्रस्थान में चले जाते थे यह संभव है कि राजा धनक ने अपना राज्य अपने लड़के को शौपकर वन प्रस्थान में चले गए और ईश्वर की तपस्या में लीन हो गए वहां पर भगवान शंकर ने प्रसन्न होकर उन्हें शक्ति प्रदान की और वह शक्ति थी धनुष बान।
यह शक्ति राजा धनक द्वारा अपने शेष पुत्रों को दे दी गई इन पुत्रों ने अपने पिता राजा धनक के नाम पर अपना पृथक से धनक वंश चलाया किंतु वे अधिक शक्तिशाली नहीं रहे और उनके राज्य का शीघ्र पतन हो गया आतः किसी भी ग्रंथ में उनका उल्लेख नहीं मिलता है राजा जनक की राजधानी महिष्मति (महेश्वर) थी उनका राज्य विदर्भ एवं वैदेही तक फैला हुआ था। इनके राज्य में जहाजों से व्यापार होता था जो यूरोप के बाजार तक फैला हुआ था उनका रास्ता नर्मदा नदी के द्वार था। प्रस्तुतकर्ता.... अमित
कठेरिया
धानुक
समाज के टाइटल
धानूक एक राष्ट्रीय जाती है,
जों सम्पूर्ण भारतवर्ष में अथवा नेपाल ,
में पायी जाती हैं ,
यह जाती बिभिन्न प्रदेशों मे बिभिन्न नामो बिभिन्न उपजातीयों बिभिन्न गोत्रों
अथवा अलग अलग टाईटलों से इस्थीत हैं।
जैसे:- धानुक, धानक, धनूका, धनिक, धनवार,धेनक, धनुर, धनकया, धनेधर, धनूधारि, धनुष, क्षत्रीय, धानूष, धनुराया, धाकड़ा, धनूवंशी,धनवन्त, धनन्जय, धनकड, धानड़, धकडे, धांची, कठ, कठेरिया, कैठिया, कथेरिया, कोरी, गोरवी, जुलाहे, वसोड, वर्गी, बरार, वंशकार, वास्को, साइस, वावन, मंडल, मेहता, महतो, पटेल, महाशय, पंडवी, तलवी, रावत, राउत, हजारी, लकरीहा, भूसेली,
आदी नामो से जानै जाते हैं।
आसल मे व धानुक/धनक हि हैं।
आप सभी भाईयों से अनूरोध है कि इस मैसज को इतना सैर करें कि एक एक धानूक भाई तक पंहूच जाए,
धानूक समाज को एकत्रीत करने मे हमारा मदद करें?????
प्रस्तुतकर्ता.... अमित
धानूक एक राष्ट्रीय जाती है,
जों सम्पूर्ण भारतवर्ष में अथवा नेपाल ,
में पायी जाती हैं ,
यह जाती बिभिन्न प्रदेशों मे बिभिन्न नामो बिभिन्न उपजातीयों बिभिन्न गोत्रों
अथवा अलग अलग टाईटलों से इस्थीत हैं।
जैसे:- धानुक, धानक, धनूका, धनिक, धनवार,धेनक, धनुर, धनकया, धनेधर, धनूधारि, धनुष, क्षत्रीय, धानूष, धनुराया, धाकड़ा, धनूवंशी,धनवन्त, धनन्जय, धनकड, धानड़, धकडे, धांची, कठ, कठेरिया, कैठिया, कथेरिया, कोरी, गोरवी, जुलाहे, वसोड, वर्गी, बरार, वंशकार, वास्को, साइस, वावन, मंडल, मेहता, महतो, पटेल, महाशय, पंडवी, तलवी, रावत, राउत, हजारी, लकरीहा, भूसेली,
आदी नामो से जानै जाते हैं।
आसल मे व धानुक/धनक हि हैं।
आप सभी भाईयों से अनूरोध है कि इस मैसज को इतना सैर करें कि एक एक धानूक भाई तक पंहूच जाए,
धानूक समाज को एकत्रीत करने मे हमारा मदद करें?????
प्रस्तुतकर्ता.... अमित
कठेरिया
वीर
धानुक समाज
ताम्रपत्रों, शिलालेखों से एवं अन्य ऐतिहासिक दस्तावेजों से प्रमाणित होता है कि धानुक वीर धनुर्धर जाति रही है, जो कि सेना के अग्र भाग में चलती थी। युद्ध जीतने के लिये जहाँ-जहाँ राजा गए वहाँ पर इस जाति के लोग गए और उन्होंने वहि अपना निवास बना लिया।
भारतीय इतिहास में पानीपत में तीन युद्ध हुवा हैं। तीसरे युद्ध में दक्षिण से सेना उत्तर की और गई है। तीसरा पानीपर का युद्ध 1726 में हुवा, जिसमें दक्षिण से पेशवाओं ने अपनी सम्पुर्ण सेना लेकर उत्तर में आक्रमण किया और वे हार गए।ऐसे में वीर धनुर्धर धानुक सैनिक उत्तर में जाकर बस गए
ताम्रपत्रों, शिलालेखों से एवं अन्य ऐतिहासिक दस्तावेजों से प्रमाणित होता है कि धानुक वीर धनुर्धर जाति रही है, जो कि सेना के अग्र भाग में चलती थी। युद्ध जीतने के लिये जहाँ-जहाँ राजा गए वहाँ पर इस जाति के लोग गए और उन्होंने वहि अपना निवास बना लिया।
भारतीय इतिहास में पानीपत में तीन युद्ध हुवा हैं। तीसरे युद्ध में दक्षिण से सेना उत्तर की और गई है। तीसरा पानीपर का युद्ध 1726 में हुवा, जिसमें दक्षिण से पेशवाओं ने अपनी सम्पुर्ण सेना लेकर उत्तर में आक्रमण किया और वे हार गए।ऐसे में वीर धनुर्धर धानुक सैनिक उत्तर में जाकर बस गए
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योग की कुछ 100 जानकारी जिसका ज्ञान सबको होना चाहिए
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AMIT KATHERIYA






















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