शनिवार, 1 जून 2019

पिता........
• *पिता की सख्ती बर्दाश करो, ताकी काबील बन सको,*
• *पिता की बातें गौर से सुनो, ताकी दुसरो की न सुननी पड़े,*
• *पिता के सामने ऊंचा मत बोलो वरना भगवान तुमको निचा कर देगा,*
• *पिता का सम्मान करो, ताकी तुम्हारी संतान तुम्हारा सम्मान करे,*
• *पिता की इज्जत करो, ताकी इससे फायदा उठा सको,*
• *पिता का हुक्म मानो, ताकी खुश हाल रह सको,*
• *पिता के सामने नजरे झुका कर रखो, ताकी भगवान तुमको दुनियां मे आगे करे,*
• *पिता एक किताब है जिसपर अनुभव लिखा जाता है,*
• *पिता के आंसु तुम्हारे सामने न गिरे, वरना भगवान तुम्हे दुनिया से गिरा देगा,*
• *पिता एक एसी हस्ती है ...!!!!*
*माँ का मुकाम तो बेशक़ अपनी जगह है ! पर पिता का भी कुछ कम नही, माँ के कदमों मे स्वर्ग है पर पिता स्वर्ग का दरवाजा है, अगर दरवाज़ा ना ख़ुला तो अंदर कैसे जाओगे ?*
*जो गरमी हो या सर्दी अपने बच्चों की रोज़ी रोटी की फ़िक्र में परेशान रहता है, ना कोइ पिता के जैसा प्यार दे सकता है ना कर सकता है, अपने बच्चों से !!*
*याद रख़े सुरज गरम ज़रूर होता है मगर डूब जाए तो अंधेरा छा जाता है,*
सभी पिता को समर्पित
👍👍🙏🙏🌹🌹
एक #शेयर पिता के नाम,............................................................
अमित कठेरिया 

सोमवार, 15 अप्रैल 2019

कैसे भूल सकता है धानुक समाज 11अप्रैल 1977 का वो काला दिन जब देश के महान साहित्यकार को राजनीतिक तरीके से हत्या कर दी गई थी...........

महान साहित्यकार फणीश्वरनाथ रेणु जी जयप्रकाश नारायण जी के साथ आंदोलन में थे और उसी दौरान हुई लाठीचार्ज(तानाशाही)के वाद उन्होंने पद्मश्री पुरस्कार लौटा दिया था उनके बेटे दक्षिणेश्वर राय जी की का कहना और सरकार से मांग 24मार्च 1977 को रेणु जी को अल्शर के वजह से पटना के पीएमसीएच में भर्ती कराया गया था इसी दिन एक vvip सख्स को भी भर्ती कराया गया था रेणु जी पहले एडमिट हुए थे पर ऑपरेश थिएटर में बाद में ले जाया गया उन्होंने बताया कि आखरी दिन दिल्ली से एक डॉ बुलाए गए जिनका नाम डॉ यूएन शाही था डॉ साही ने आखिरकार किन परिस्थियों में उनको एनेस्थीसिया का डबल डोज दिया जिसके वजह से उनकी तवियत लगातार बिगड़ती गई वह 19 दिनों तक अचेतावस्था में रहे जिंदगी से संघर्ष करते रहे और 11अप्रैल 1977 उनकी निधन हो गई

करोड़ों धानुक जाती के लोग सरकारों से जानना चाहता है जब बीमारी अल्शर थी तो एनेस्थीसिया का डबल डोज क्यों दिया गया अगर सरकारें इस मुद्दे पर ध्यान नही देता है तो आने वाले 11अप्रैल उनके पुण्यतिथि पर समाज तय करेगा आगे की नीति

.......... AMIT KATHERIYA

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अब आपको किसी से कुछ भी मांगने की जरूरत नही पड़ेगी
> सम्पूर्ण एन.सी.ई.आर.टी पुस्तकें - https://drive.google.com/folderview…
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> X-EEED Publication - https://drive.google.com/folderview…
> Discovery Publication - https://drive.google.com/folderview…
> Drishti The Vision Publication - https://drive.google.com/folderview…
> Drishti IAS Coching - https://drive.google.com/folderview…
> The Institute publication - https://drive.google.com/folderview…
> Nirman IAS Coching - https://drive.google.com/folderview…
> Cronical IAS Coching - https://drive.google.com/folderview…
> Dhingara Coching - https://drive.google.com/folderview…
> Sankalp Civil Services Coching - https://drive.google.com/folderview…
> Sabadhani Coching - https://drive.google.com/folderview…

> 👆🏻उपर्युक्त कुछ नामानुसार उस संस्था व प्रकाशन द्वारा निर्मित PDF उपलब्ध है.......

AMIT KATHERIYA





# जहर #

(एथलीन पाउडर)......

===============

बीमार पड़ने पर डॉक्टर की सलाह मिलती हैं, फल खाइये,ज्यूस पीजिए....मतलब फल और ज्यूस शरीर के लिए अधिक लाभप्रद है... उनका मानना एक हद तक ठीक भी हैं, पर क्या वाकई फलो से शरीर को लाभ मिल रहा हैं, या वे भी शरीर को खत्म करने के लिए एक स्लो पाइजन हैं.... !!!
देशी फलो को छोड़ दे तो अधिकतर फल जहर से पक रहे है... ।
कुछ वर्ष पूर्व तक जब कैले बेचने वाला आता तो आवाज लगाता "कैले, मीठे छींटेदार कैले"....पर अब छींटेदार केले की जगह फ्रेश पीले कैले बाजार मे मिलने लगे हैं, सबको खूब पसंद आते है ,कहते है बिल्कुल फ्रेश हैं... पर उन्हें क्या पता इसे किस जहर में डुबकी लगाकर हमे परोसा जा रहा हैं....यह फ्रेश केला एक दिन में पक जाता हैं, वही साधारण रूप से यह बर्फ में रखने पर केला आठ से दस दिनों में पकता हैं... जो केमिकल आठ दिन में पकने वाले केले को एक दिन में पका देता हैं तो फिर आपको ओर हमको क्या छोड़ेगा😢....।

ऐसे ही कार्बेट की पुडिय़ा आम की पेटी में दबाते है... दो से तीन दिन में #आम का रंग बदल जाता है...रासायनिक रूप से आम पक जाता हैं...।
चटक लाल रंग के लिए हनीवैक्स यानी मोम का इस्तेमाल #सेब के लिये किया जाता है...।
पपीता के बीच कागज में कार्बेट की पुडिय़ा दबा देते हैं.. दो दिन में ही #पपीता पककर पीला हो जाता है..।
केमिकल के सॉल्यूशन में #अंगूर गुच्छे डुबोए जाते हैं... दो दिन में अंगूर पक जाते हैं...।
सब कुछ इतना हमे फ़ास्ट चाहिए तो फिर हमें जहर ही खाना होगा,डॉक्टर और मेडिकल वाले सुस्वागतम का बोर्ड लगाए आपका इंतजार कर रहे होंगे...।

      अमित कठेरिया

सोमवार, 21 जनवरी 2019

#_फलों_पर_लगे_स्टिकर्स_का_असली_मतलब_क्या_होता_है
#_क्यॊ_लगाए_जाते_हे_स्टिकर्स
आप जब फलों की खरीदारी करते है तो आपको कई फलों कर स्टीकर लगे हुए जिसे आप शायद बेमतलब समझते होंगे
ये छोटे स्टीकर फलों के बारे काफी कुछ कहते है।

#_क्या_मतलब_होता_है
यह PLU कोड या दूसरे शब्दों में,#_मूल्य_लुक_संख्या कहा जाता है। यह आपको बताता है कि फल कैसे उगाया गया था
पीएलयू कोड पढ़ने से, आप बता सकते हैं कि क्या #_फल_आनुवंशिक_रूप_से_संशोधित_संगठनात्मक_रूप से विकसित या रासायनिक उर्वरकों, फंगलसाइड या हर्बाइसाइड से उत्पन्न होता है।
#_परंपरागत रूप से (रसायनों और कीटनाशकों के साथ बढ़े हुए) फल के स्टिकर पर #_चार_अंकों_की_संख्या होती है
पीएलयू कोड के सभी चार अक्षर केवल किस तरह का सब्जी या फल हैं विभिन्न प्रकार के फलों और सब्जियों के लिए अलग-अलग कोड हैं
सभी #_केले_को_4011 के कोड के साथ लेबल किया गया है,
#_जबकि_4131_सेब के लिए कोड है
गैर-ऑर्गेनिक फल (आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य) की संख्या “8” से शुरू होने वाला पांच अंकीय कोड है।
नोट करें कि अगर आप पीएलयू कोड पर जानकारी देख रहे हैं, तो 5 अंक वाले कोड की पहली संख्या शामिल न करें-पहला संख्या केवल #_जीएमओ_उत्पादों के लिए एक पहचानकर्ता है।
#_उदाहरण_के लिए, 4011 एक मानक पीले केला होगा,
लेकिन 84011 एक आनुवंशिक रूप से संशोधित मानक पीले केले होगा।
हालांकि, लगभग 26 देशों ने जीएमओ खाद्य पदार्थों पर प्रतिबंध लगा दिया है।
“9” संख्या से शुरू होने वाले कार्बनिक फल के पांच अंक कोड होते हैं। अगर पीएलयू कोड में पांच संख्याएं हैं, और संख्या “9” से शुरू होती है, तो यह आपको बताता है कि उत्पादन व्यवस्थित हो गया था और आनुवंशिक रूप से संशोधित नहीं किया गया था।
एक कार्बनिक केला होगा: 94011.
#_जब आप बाजार से फलों को चुनते हैं, तो कृपया सुनिश्चित करें कि आप किस प्रकार के फलों को खरीदना चाहते हैं। यह भी सावधानी के एक शब्द पर विचार करें कि यह पीएलयू प्रणाली स्वैच्छिक है और यह आवश्यक नहीं है कि हर निर्माता उनका उपयोग करें।
AMIT KATHERIYA

यदि आपको आने वाले इग्जाम (exam) ने स्ट्रेस दे दिया है तो इसे पढ़ लें….......................(1)

फिर से परीक्षा का बुखार सर पर चढ़ रहा है. IBPS, RRB, IAS MAINS न जाने कितनी परीक्षाओं की तैयारियों में आप लगे होंगे. पता नहीं आपके साथ कभी हुआ या नहीं.“तैयारी”शब्द से मुझे घृणा होने लगी थी. कोई भी पड़ोस से घर में आता और पूछता आप का बेटा क्या कर रहा है.

माँ कहती “तैयारी” कर रहा है. मेरे पिताजी के मित्र अपने बेटे की बड़ी-बड़ी कंपनियों में प्लेसमेंट की खबर उन्हें सुनाते और उनसे पूछ डालते कि आप अपने बेटे की अपडेट नहीं बता रहे….वो क्या कर रहा है? फिर से वह तैयारी शब्द सामने आ जाता. मेरा बेटा “तैयारी” में जुटा है. “तैयारी” शब्द मेरे लिए सनी देओल द्वारा ऊँचे स्वर में बोले गए “तारीख पे तारीख” जैसी इरिटेटिंग हो गया था. अरे भाई,कौन-सी “तैयारी”, कैसी “तैयारी”….मैं खुद से पूछता. आखिर कब इन परीक्षाओं से पाला छूटेगा. होगा भी या नहीं?
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आखिरी अटेम्प्ट है. इन्हीं घबराहटों के साथ फिर से वही “तैयारी” में जुट जाता जो रुकने का नाम नहीं ले रही थी. कांपते हाथों से DI (data interpretation) और Maths को हल करता रहता. कॉपी पर लिखा हर अंक जैसे मानों मुझे कह रहा हो कि बेटा तू किस दिशा में जा रहा है? क्या यही तेरा भविष्य है? तू मुझे हल (solve) कर के क्या ख़ाक उखाड़ लेगा? इंग्लिश (English) भी तेरा इंतज़ार कर रही है. इंग्लिश पारकर लेगा तो जटिल GK और करंट देनेवाला करंट अफेयर्स तेरा बेड़ा गर्क कर देगा और इन सब के बावजूद तू अगर इंटरव्यू (interview) तक पहुँच गया, तो वहाँ बैठे दानव तेरी पढ़ाई की कुंडली को खंगाल कर तुझे कंगाल कर देंगे.
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यदि आपको आने वाले इग्जाम (exam) ने स्ट्रेस दे दिया है तो इसे पढ़ लें….(2)

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पहली बात तो ये कि यदि इस अप्रोच के साथ तैयारी में जुटे हो या आपके मन में ऐसा कुछ है कि अपने किसी दूर के परिवार के सदस्य या अपने पड़ोसी को सिर्फ दिखाने के लिए कि “हाँ मैं एक आईएएस (IAS) या बैंक पीओ (bank po) बन सकता हूँ”—- तो आप गलत रास्ते पर जा रहे हो. दूसरों की नज़र में खुद को प्रूव करना कोई बहादुरी नहीं, मूर्खता है. जिसके लिए आप प्रूव करने की सोच रहे हो, वो खुद नहीं चाहते कि आपकी नौकरी लगे या आपका कुछ अच्छा हो. उसके लिए प्रयास करना खुद को तंग करना है और समय की बरबादी है. तैयारी खुद को प्रूव करने के लिए जरुर कीजिये मगर इसे अपने भर तक सीमित रखिये. परीक्षा की तैयारी खूब जोर-शोर से कीजिये. आपको १०% भी लगे कि आप इस परीक्षा को निकाल सकते हैं तो अपनी तैयारी में कोई कमी नहीं आने दें.
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१० घंटे पढ़ने से अच्छा है कि आप तीन से चार घंटा ही पढ़िए. मगर याद रखें, यह ३-४ घंटा सिर्फ आपका होना चाहिए. फुल फोकस होकर पढ़े और अपनी कमियों पर ध्यान दें. यदि आपका मैथ्स कमजोर (weak maths) है, तो उसे एवरेज लेवल (average level) तक लाइये और जिस विषय पर आपकी पकड़ ज्यादा है उसे और भी तगड़ा बनाइये ताकि ओवर ऑल मार्क्स अच्छा आये और सेक्शनल कट ऑफ (sectional cut-off) के जंजाल से आपको मुक्ति मिले. अपने कमजोर पक्ष को हमेशा औसत बनाने की कोशिश करें.
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बहुत लोग आपको यह सलाह देते होंगे कि आपका मैथ्स खराब है तो खूब मैथ्स पढ़ो. दिन-रात एक कर दो, सुधरेगा क्यों नहीं? पर मेरा मानना है, कि जो सब्जेक्ट कमजोर है उसे औसत बनाने का कोशिश कीजिये, वही आपके लिए पर्याप्त है. बाकी विषयों पर अधिक ध्यान दे कर उन्हें मजबूत करें. बेस्ट रिजल्ट (best result) अगर जल्दी नहीं आया, तो हताश न हों. धैर्य रखें. लगे रहें, जुटे रहें उस काम में.
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सभी के जीवन मेंडिस्टर्बेंस (disturbance) है. आपको दोस्तों से वाट्सएप (whatsapp) पर चिट-चैट करना है. शादी के मौसम में शादी भी अटेंड करनी है, आप भी पढ़ते-पढ़ते थकोगे और फिर हार मान लोगे, मन बदलेगा, खुद से कहोगे, नहीं अब और नहीं, अब नहीं पढ़ सकता, फिर से पढने बैठोगे…..भारत पाकिस्तान का मैच देखोगे, ज्यादा ही मैच में रूचि है तो टेस्ट मैच भी देख डालोगे, फेसबुक में लाल-लाल नोटिफिकेशन देखने में जो आनंद आता है वह इस बोरिंग किताब के काले-काले अक्षरों में कहाँ! क्यों? इसीलिए इन सब डिस्टर्बेंस को मन में बाँध के चलिए, चाहे दुनिया ही क्यूँ नहीं पलट जाए, आप इनसे दूर नहीं भाग सकते.
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कुछ लोग शिकायत बहुत करते हैं. मेरा मैथ्स अच्छा नहीं, मेरी इंग्लिश तो एक दम रद्दी है. पता नहीं कैसे होगा. इस बार तो उम्मीद कम ही है. मगर एक होशियार इंसान इन बातों से दूरी बनाए रखता है और प्रयास में लगा रहता है जब तक रिजल्ट पॉजिटिव (positive result) न हो जाए.
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कोचिंग (coaching) और सेल्फ स्टडी (self-study)दोनों का अपना-अपना महत्त्व है. कोचिंग में परीक्षा के पैटर्न का पता चलता है और पढ़ाई में एक नियमितता आती है. आप रोज कोचिंग जाते हो, अपने जैसे परीक्षार्थियों से मिलते हो, कुछ सीखने को मिलता है. वहीँ सेल्फ-स्टडी से अपनी कमजोरियों का पता चलता है. जब सवाल नहीं बनते तो आप उनसे जूझते हो, खुद को धिक्कारते हो, गलतियों को ढूँढ़ते हो. कहाँ कमी रह गयी, यह जाने का प्रयास करते हो जो कोचिंग में रहकर संभव नहीं.

AMIT KATHERIYA

गुरुवार, 4 अक्टूबर 2018

धानुक (धानक ) एक ही है 🏹🏹
धानक समाज की टीम ने 2 महीने की मेहनत कर भारत के समस्त राज्यों से धानक जनसँख्या जानने की कोशिश की हे जिसके अनुसार सूची तयार हुई हे। उम्मीद हे धानक अपनी शक्ति पहचाने और एकजुट होकर कार्य करे :
भारत वर्ष में #धानुक समाज अलग अलग
प्रांतो में अलग अलग नामों से जाना जाता है जिनमें कुछ प्रमुख नाम इस प्रकार हैं।
#धानुक, #मंडल, #मेहतो, #धानक, #धाणक, #धानका, #धाणका, #धानुका, #धनिक,
#धनवार, #धेनुक, #धानकया, #धेनुधर,
#धनुधारी, #धनुष क्षत्रिय, #धानुष,
#धानुषराय, #धनुवंशी, #धनवन, #धनवंत,
#धनन्जय, #धनकर, #धन्नुवंशी, #धानकवाल,
#धनकपाल, #धानविक, #धाकड, #धाकरे,
#कठ, #कठेरिया, #कथेरिया,, #गोरवी,
#जुलाहे, #वसोड, #वर्गी, #बरार, #वंशकार,
#वास्को, #साइस, #बावन, #महाशय, #तडवी,
#तलवी,आदी.।
संकलन:-धानुक दर्पण
1) जम्मू कश्मीर : 2 लाख + 4 लाख विस्थापित
2) पंजाब : 9 लाख
3) हरियाणा : 90 लाख
4) राजस्थान : 78 लाख
5) गुजरात : 60 लाख
6) महाराष्ट्र : 45 लाख
7) गोवा : 5 लाख
8) कर्णाटक : 45 लाख
9) केरल : 12 लाख
10) तमिलनाडु : 36 लाख
11) आँध्रप्रदेश : 24 लाख
12) छत्तीसगढ़ : 24 लाख
13) उड़ीसा : 37 लाख
14) झारखण्ड : 12 लाख
15) बिहार : 90 लाख
16) पश्चिम बंगाल : 18 लाख
17) मध्य प्रदेश : 42 लाख
18) उत्तर प्रदेश : 80
19) उत्तराखंड : 20 लाख
20) हिमाचल : 45 लाख
21) सिक्किम : 1 लाख
22) आसाम : 10 लाख
23) मिजोरम : 1.5 लाख
24) अरुणाचल : 1 लाख
25) नागालैंड : 2 लाख
26) मणिपुर : 7 लाख
27) मेघालय : 9 लाख
28) त्रिपुरा : 2 लाख

सबसे ज्यादा धानक वाला राज्य: U.P
सबसे कम धानक वाला राज्य : सिक्किम

सबसे ज्यादा धानक राजनैतिक वर्चस्व : Rajasthan

सबसे ज्यादा प्रतिशत वाला राज्य : मध्यप्रदेश में जनसँख्या के 60% धानक

सबसे ज्यादा अच्छी आर्थिक स्तिथि में धानक : punjab

सबसे ज्यादा धानक मुख्यमंत्री वाला राज्य : M. P

सबसे ज्यादा धानक सरपँच वाला राज्य : Rajasthan
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इस संदेश को इतना फैलाओ कि हर धानक के मोबाईल मे पहुँचे ....

जय हो धानक माधव की जय कृष्ण जी की
धानक का मतलब अभीर होता अभीर का मतलब निडर होता है भगवान यदु ने साँप का दमन किया था तब से धानक को चौधरी भी कहा जाता है         ....AMIT KATHERIYA

बुधवार, 15 अगस्त 2018

जय हिंद  जय भारत
*तिरंगा फहराने से पहले जान लें ये बातें*                                                                                       1. क्या आप जानते हैं कि देश में फ्लैग_कोड_ऑफ_इंडिया (भारतीय ध्वज संहिता) नाम का एक कानून है, जिसमें तिरंगे को फहराने के कुछ नियम-कायदे निर्धारित किए गए हैं।
2. यदि कोई शख्स फ्लैग कोड ऑफ इंडिया के तहत गलत तरीके से तिरंगा फहराने का दोषी पाया जाता है तो उसे जेल भी हो सकती है। इसकी अवधि तीन साल तक बढ़ाई जा सकती है या जुर्माना लगाया जा सकता है या दोनों भी हो सकते हैं।
3. 
तिरंगा हमेशा कॉटन, सिल्क या फिर खादी का ही होना चाहिए। प्लास्टिक का झंडा बनाने की मनाही है।
4. 
किसी भी स्तिथि में फटे या क्षतिग्रस्त झंडे को नहीं फहराया जा सकता है।
5. 
तिरंगे का निर्माण हमेशा रेक्टेंगल शेप में ही होगा। जिसका अनुपात 3:2 ही होना चाहिए।
6. 
झंडे का यूज किसी भी प्रकार के यूनिफॉर्म या सजावट के सामान में नहीं हो सकता।
7. 
झंडे पर कुछ भी बनाना या लिखना गैरकानूनी है।
8. 
किसी भी गाड़ी के पीछे, बोट या प्लेन में तिरंगा यूज नहीं किया जा सकता है। इसका प्रयोग किसी बिल्डिंग को ढ़कने में भी नहीं किया जा सकता है।
9. 
किसी भी स्तिथि में झंडा (तिरंगा) जमीन पर टच नहीं होना चाहिए।
10. 
जब झंडा फट जाए या मैला हो जाए तो उसे एकांत में पूरा नष्ट किया जाए।
11. 
झंडा केवल राष्ट्रीय शोक के अवसर पर ही आधा झुका रहता है।
12. 
किसी भी दूसरे झंडे को राष्ट्रीय झंडे से ऊंचा या ऊपर नहीं लगा सकते और न ही बराबर रख सकते है।
13. 
जब तिरंगा फट जाए या रंग उड़ जाए तो इसे फहराया नहीं जा सकता। ऐसा करना राष्ट्रध्वज का अपमान करने वाला अपराध माना जाता है।
14. 
जब तिरंगा फट जाता है तब इसे गोपनीय तरीके से सम्मान के साथ जला दिया जाता है या पवित्र नदी में जल समाधि दे दी जाती है।
15. 
शहीदों के पार्थिव शरीर से उतारे गए झंडे को भी गोपनीय तरीके से सम्मान के साथ जला दिया जाता है या नदी में जल समाधि दी जाती है।
16. 
सबसे पहले लाल, पीले व हरे रंग की हॉरिजॉन्टल पट्टियों पर बने झंडे को 7 अगस्त 1906 को पारसी बागान चौक (ग्रीन पार्क), कोलकाता में फहराया गया था।
17. 
भारत के राष्ट्रीय ध्वज को पिंगली वैंकेया ने डिजाइन किया था।
18. 
अभी जो तिरंगा फहराया जाता है उसे 22 जुलाई 1947 को अपनाया गया था। इससे पहले इसमें 6 बार बदलाव किया गया था।
19. 3 
हिस्से से बने झंडे में सबसे ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और नीचे हरे रंग की एक बराबर पट्टियां होती है।
21. 
सफेद पट्टी के बीच में गहरे नीले रंग का एक चक्र होता है। इसका व्यास लगभग सफेद पट्टी की चौड़ाई के बराबर होता है और इसमें 24 तिलियां बनी होती हैं।
22. 22 
जुलाई 1947 से पहले तिरंगे के बीच में चक्र की जगह पर चरखा होता था। इस झंडे को 1931 में अपनाया गया था।
23. 26 
जनवरी 2002 को भारतीय ध्वज संहिता में एमेंडमेंट किया गया। इसके बाद लोगों को अपने घरों और ऑफिस में आम दिनों में तिरंगा फहराने की अनुमति मिल गई।
24. 
झारखंड की राजधानी रांची में 23 जनवरी 2016 को सबसे ऊंचा तिरंगा फहराया गया। 66*99 साइज के इस तिरंगे को जमीन से 493 फीट ऊंचाई पर फहराया गया।
25. 
राष्ट्रपति भवन के म्यूजियम में एक छोटा तिरंगा रखा हुआ है, जिसे सोने के स्तंभ पर हीरे-जवाहरातों से जड़ कर बनाया गया है।
26. 
भारत में बैंगलुरू से 420 किमी दूर स्थित हुबली एक मात्र लाइसेंस प्राप्त संस्थान है जो झंडा बनाने का और सप्लाई करने का काम करता है।
27. 29 
मई 1953 में भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा सबसे ऊंची पर्वत की चोटी माउंट एवरेस्ट पर यूनियन जैक तथा नेपाली राष्ट्रीय ध्वज के साथ फहराता नजर आया था इस समय शेरपा तेनजिंग और एडमंड माउंट हिलेरी ने एवरेस्ट फतह की थी।
28. 
पहली बार 21 अप्रैल 1996 के दिन स्क्वाड्रन लीडर संजय थापर ने तिरंगे की शान बढाते हुए एम. आई.-8 हेलिकॉप्टर से 10000 फीट की ऊंचाई से कूदकर देश के झंडे को उत्तरी ध्रुव में फहराया था।
29. 1984 
में विंग कमांडर राकेश शर्मा ने भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को लेकर अंतरिक्ष के लिए पहली उड़ान भरी थी।
30. 
दिसंबर 2014 से चेन्नई में 50,000 स्वयंसेवकों द्वारा मानव झंडा बनाने का विश्व रिकॉर्ड भी भारतीयों के पास ही है।
जय हिंद
जय भारत . .......... AMIT KATHERIYA

































         

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योग की कुछ 100 जानकारी जिसका ज्ञान सबको होना चाहिए

1.योग,भोग और रोग ये तीन अवस्थाएं है। 2. लकवा - सोडियम की कमी के कारण होता है । 3. हाई वी पी में - स्नान व सोने से पूर्व एक गिलास जल का सेवन ...