सोमवार, 21 जनवरी 2019

#_फलों_पर_लगे_स्टिकर्स_का_असली_मतलब_क्या_होता_है
#_क्यॊ_लगाए_जाते_हे_स्टिकर्स
आप जब फलों की खरीदारी करते है तो आपको कई फलों कर स्टीकर लगे हुए जिसे आप शायद बेमतलब समझते होंगे
ये छोटे स्टीकर फलों के बारे काफी कुछ कहते है।

#_क्या_मतलब_होता_है
यह PLU कोड या दूसरे शब्दों में,#_मूल्य_लुक_संख्या कहा जाता है। यह आपको बताता है कि फल कैसे उगाया गया था
पीएलयू कोड पढ़ने से, आप बता सकते हैं कि क्या #_फल_आनुवंशिक_रूप_से_संशोधित_संगठनात्मक_रूप से विकसित या रासायनिक उर्वरकों, फंगलसाइड या हर्बाइसाइड से उत्पन्न होता है।
#_परंपरागत रूप से (रसायनों और कीटनाशकों के साथ बढ़े हुए) फल के स्टिकर पर #_चार_अंकों_की_संख्या होती है
पीएलयू कोड के सभी चार अक्षर केवल किस तरह का सब्जी या फल हैं विभिन्न प्रकार के फलों और सब्जियों के लिए अलग-अलग कोड हैं
सभी #_केले_को_4011 के कोड के साथ लेबल किया गया है,
#_जबकि_4131_सेब के लिए कोड है
गैर-ऑर्गेनिक फल (आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य) की संख्या “8” से शुरू होने वाला पांच अंकीय कोड है।
नोट करें कि अगर आप पीएलयू कोड पर जानकारी देख रहे हैं, तो 5 अंक वाले कोड की पहली संख्या शामिल न करें-पहला संख्या केवल #_जीएमओ_उत्पादों के लिए एक पहचानकर्ता है।
#_उदाहरण_के लिए, 4011 एक मानक पीले केला होगा,
लेकिन 84011 एक आनुवंशिक रूप से संशोधित मानक पीले केले होगा।
हालांकि, लगभग 26 देशों ने जीएमओ खाद्य पदार्थों पर प्रतिबंध लगा दिया है।
“9” संख्या से शुरू होने वाले कार्बनिक फल के पांच अंक कोड होते हैं। अगर पीएलयू कोड में पांच संख्याएं हैं, और संख्या “9” से शुरू होती है, तो यह आपको बताता है कि उत्पादन व्यवस्थित हो गया था और आनुवंशिक रूप से संशोधित नहीं किया गया था।
एक कार्बनिक केला होगा: 94011.
#_जब आप बाजार से फलों को चुनते हैं, तो कृपया सुनिश्चित करें कि आप किस प्रकार के फलों को खरीदना चाहते हैं। यह भी सावधानी के एक शब्द पर विचार करें कि यह पीएलयू प्रणाली स्वैच्छिक है और यह आवश्यक नहीं है कि हर निर्माता उनका उपयोग करें।
AMIT KATHERIYA

यदि आपको आने वाले इग्जाम (exam) ने स्ट्रेस दे दिया है तो इसे पढ़ लें….......................(1)

फिर से परीक्षा का बुखार सर पर चढ़ रहा है. IBPS, RRB, IAS MAINS न जाने कितनी परीक्षाओं की तैयारियों में आप लगे होंगे. पता नहीं आपके साथ कभी हुआ या नहीं.“तैयारी”शब्द से मुझे घृणा होने लगी थी. कोई भी पड़ोस से घर में आता और पूछता आप का बेटा क्या कर रहा है.

माँ कहती “तैयारी” कर रहा है. मेरे पिताजी के मित्र अपने बेटे की बड़ी-बड़ी कंपनियों में प्लेसमेंट की खबर उन्हें सुनाते और उनसे पूछ डालते कि आप अपने बेटे की अपडेट नहीं बता रहे….वो क्या कर रहा है? फिर से वह तैयारी शब्द सामने आ जाता. मेरा बेटा “तैयारी” में जुटा है. “तैयारी” शब्द मेरे लिए सनी देओल द्वारा ऊँचे स्वर में बोले गए “तारीख पे तारीख” जैसी इरिटेटिंग हो गया था. अरे भाई,कौन-सी “तैयारी”, कैसी “तैयारी”….मैं खुद से पूछता. आखिर कब इन परीक्षाओं से पाला छूटेगा. होगा भी या नहीं?
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आखिरी अटेम्प्ट है. इन्हीं घबराहटों के साथ फिर से वही “तैयारी” में जुट जाता जो रुकने का नाम नहीं ले रही थी. कांपते हाथों से DI (data interpretation) और Maths को हल करता रहता. कॉपी पर लिखा हर अंक जैसे मानों मुझे कह रहा हो कि बेटा तू किस दिशा में जा रहा है? क्या यही तेरा भविष्य है? तू मुझे हल (solve) कर के क्या ख़ाक उखाड़ लेगा? इंग्लिश (English) भी तेरा इंतज़ार कर रही है. इंग्लिश पारकर लेगा तो जटिल GK और करंट देनेवाला करंट अफेयर्स तेरा बेड़ा गर्क कर देगा और इन सब के बावजूद तू अगर इंटरव्यू (interview) तक पहुँच गया, तो वहाँ बैठे दानव तेरी पढ़ाई की कुंडली को खंगाल कर तुझे कंगाल कर देंगे.
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यदि आपको आने वाले इग्जाम (exam) ने स्ट्रेस दे दिया है तो इसे पढ़ लें….(2)

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पहली बात तो ये कि यदि इस अप्रोच के साथ तैयारी में जुटे हो या आपके मन में ऐसा कुछ है कि अपने किसी दूर के परिवार के सदस्य या अपने पड़ोसी को सिर्फ दिखाने के लिए कि “हाँ मैं एक आईएएस (IAS) या बैंक पीओ (bank po) बन सकता हूँ”—- तो आप गलत रास्ते पर जा रहे हो. दूसरों की नज़र में खुद को प्रूव करना कोई बहादुरी नहीं, मूर्खता है. जिसके लिए आप प्रूव करने की सोच रहे हो, वो खुद नहीं चाहते कि आपकी नौकरी लगे या आपका कुछ अच्छा हो. उसके लिए प्रयास करना खुद को तंग करना है और समय की बरबादी है. तैयारी खुद को प्रूव करने के लिए जरुर कीजिये मगर इसे अपने भर तक सीमित रखिये. परीक्षा की तैयारी खूब जोर-शोर से कीजिये. आपको १०% भी लगे कि आप इस परीक्षा को निकाल सकते हैं तो अपनी तैयारी में कोई कमी नहीं आने दें.
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१० घंटे पढ़ने से अच्छा है कि आप तीन से चार घंटा ही पढ़िए. मगर याद रखें, यह ३-४ घंटा सिर्फ आपका होना चाहिए. फुल फोकस होकर पढ़े और अपनी कमियों पर ध्यान दें. यदि आपका मैथ्स कमजोर (weak maths) है, तो उसे एवरेज लेवल (average level) तक लाइये और जिस विषय पर आपकी पकड़ ज्यादा है उसे और भी तगड़ा बनाइये ताकि ओवर ऑल मार्क्स अच्छा आये और सेक्शनल कट ऑफ (sectional cut-off) के जंजाल से आपको मुक्ति मिले. अपने कमजोर पक्ष को हमेशा औसत बनाने की कोशिश करें.
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बहुत लोग आपको यह सलाह देते होंगे कि आपका मैथ्स खराब है तो खूब मैथ्स पढ़ो. दिन-रात एक कर दो, सुधरेगा क्यों नहीं? पर मेरा मानना है, कि जो सब्जेक्ट कमजोर है उसे औसत बनाने का कोशिश कीजिये, वही आपके लिए पर्याप्त है. बाकी विषयों पर अधिक ध्यान दे कर उन्हें मजबूत करें. बेस्ट रिजल्ट (best result) अगर जल्दी नहीं आया, तो हताश न हों. धैर्य रखें. लगे रहें, जुटे रहें उस काम में.
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सभी के जीवन मेंडिस्टर्बेंस (disturbance) है. आपको दोस्तों से वाट्सएप (whatsapp) पर चिट-चैट करना है. शादी के मौसम में शादी भी अटेंड करनी है, आप भी पढ़ते-पढ़ते थकोगे और फिर हार मान लोगे, मन बदलेगा, खुद से कहोगे, नहीं अब और नहीं, अब नहीं पढ़ सकता, फिर से पढने बैठोगे…..भारत पाकिस्तान का मैच देखोगे, ज्यादा ही मैच में रूचि है तो टेस्ट मैच भी देख डालोगे, फेसबुक में लाल-लाल नोटिफिकेशन देखने में जो आनंद आता है वह इस बोरिंग किताब के काले-काले अक्षरों में कहाँ! क्यों? इसीलिए इन सब डिस्टर्बेंस को मन में बाँध के चलिए, चाहे दुनिया ही क्यूँ नहीं पलट जाए, आप इनसे दूर नहीं भाग सकते.
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कुछ लोग शिकायत बहुत करते हैं. मेरा मैथ्स अच्छा नहीं, मेरी इंग्लिश तो एक दम रद्दी है. पता नहीं कैसे होगा. इस बार तो उम्मीद कम ही है. मगर एक होशियार इंसान इन बातों से दूरी बनाए रखता है और प्रयास में लगा रहता है जब तक रिजल्ट पॉजिटिव (positive result) न हो जाए.
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कोचिंग (coaching) और सेल्फ स्टडी (self-study)दोनों का अपना-अपना महत्त्व है. कोचिंग में परीक्षा के पैटर्न का पता चलता है और पढ़ाई में एक नियमितता आती है. आप रोज कोचिंग जाते हो, अपने जैसे परीक्षार्थियों से मिलते हो, कुछ सीखने को मिलता है. वहीँ सेल्फ-स्टडी से अपनी कमजोरियों का पता चलता है. जब सवाल नहीं बनते तो आप उनसे जूझते हो, खुद को धिक्कारते हो, गलतियों को ढूँढ़ते हो. कहाँ कमी रह गयी, यह जाने का प्रयास करते हो जो कोचिंग में रहकर संभव नहीं.

AMIT KATHERIYA

गुरुवार, 4 अक्टूबर 2018

धानुक (धानक ) एक ही है 🏹🏹
धानक समाज की टीम ने 2 महीने की मेहनत कर भारत के समस्त राज्यों से धानक जनसँख्या जानने की कोशिश की हे जिसके अनुसार सूची तयार हुई हे। उम्मीद हे धानक अपनी शक्ति पहचाने और एकजुट होकर कार्य करे :
भारत वर्ष में #धानुक समाज अलग अलग
प्रांतो में अलग अलग नामों से जाना जाता है जिनमें कुछ प्रमुख नाम इस प्रकार हैं।
#धानुक, #मंडल, #मेहतो, #धानक, #धाणक, #धानका, #धाणका, #धानुका, #धनिक,
#धनवार, #धेनुक, #धानकया, #धेनुधर,
#धनुधारी, #धनुष क्षत्रिय, #धानुष,
#धानुषराय, #धनुवंशी, #धनवन, #धनवंत,
#धनन्जय, #धनकर, #धन्नुवंशी, #धानकवाल,
#धनकपाल, #धानविक, #धाकड, #धाकरे,
#कठ, #कठेरिया, #कथेरिया,, #गोरवी,
#जुलाहे, #वसोड, #वर्गी, #बरार, #वंशकार,
#वास्को, #साइस, #बावन, #महाशय, #तडवी,
#तलवी,आदी.।
संकलन:-धानुक दर्पण
1) जम्मू कश्मीर : 2 लाख + 4 लाख विस्थापित
2) पंजाब : 9 लाख
3) हरियाणा : 90 लाख
4) राजस्थान : 78 लाख
5) गुजरात : 60 लाख
6) महाराष्ट्र : 45 लाख
7) गोवा : 5 लाख
8) कर्णाटक : 45 लाख
9) केरल : 12 लाख
10) तमिलनाडु : 36 लाख
11) आँध्रप्रदेश : 24 लाख
12) छत्तीसगढ़ : 24 लाख
13) उड़ीसा : 37 लाख
14) झारखण्ड : 12 लाख
15) बिहार : 90 लाख
16) पश्चिम बंगाल : 18 लाख
17) मध्य प्रदेश : 42 लाख
18) उत्तर प्रदेश : 80
19) उत्तराखंड : 20 लाख
20) हिमाचल : 45 लाख
21) सिक्किम : 1 लाख
22) आसाम : 10 लाख
23) मिजोरम : 1.5 लाख
24) अरुणाचल : 1 लाख
25) नागालैंड : 2 लाख
26) मणिपुर : 7 लाख
27) मेघालय : 9 लाख
28) त्रिपुरा : 2 लाख

सबसे ज्यादा धानक वाला राज्य: U.P
सबसे कम धानक वाला राज्य : सिक्किम

सबसे ज्यादा धानक राजनैतिक वर्चस्व : Rajasthan

सबसे ज्यादा प्रतिशत वाला राज्य : मध्यप्रदेश में जनसँख्या के 60% धानक

सबसे ज्यादा अच्छी आर्थिक स्तिथि में धानक : punjab

सबसे ज्यादा धानक मुख्यमंत्री वाला राज्य : M. P

सबसे ज्यादा धानक सरपँच वाला राज्य : Rajasthan
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इस संदेश को इतना फैलाओ कि हर धानक के मोबाईल मे पहुँचे ....

जय हो धानक माधव की जय कृष्ण जी की
धानक का मतलब अभीर होता अभीर का मतलब निडर होता है भगवान यदु ने साँप का दमन किया था तब से धानक को चौधरी भी कहा जाता है         ....AMIT KATHERIYA

बुधवार, 15 अगस्त 2018

जय हिंद  जय भारत
*तिरंगा फहराने से पहले जान लें ये बातें*                                                                                       1. क्या आप जानते हैं कि देश में फ्लैग_कोड_ऑफ_इंडिया (भारतीय ध्वज संहिता) नाम का एक कानून है, जिसमें तिरंगे को फहराने के कुछ नियम-कायदे निर्धारित किए गए हैं।
2. यदि कोई शख्स फ्लैग कोड ऑफ इंडिया के तहत गलत तरीके से तिरंगा फहराने का दोषी पाया जाता है तो उसे जेल भी हो सकती है। इसकी अवधि तीन साल तक बढ़ाई जा सकती है या जुर्माना लगाया जा सकता है या दोनों भी हो सकते हैं।
3. 
तिरंगा हमेशा कॉटन, सिल्क या फिर खादी का ही होना चाहिए। प्लास्टिक का झंडा बनाने की मनाही है।
4. 
किसी भी स्तिथि में फटे या क्षतिग्रस्त झंडे को नहीं फहराया जा सकता है।
5. 
तिरंगे का निर्माण हमेशा रेक्टेंगल शेप में ही होगा। जिसका अनुपात 3:2 ही होना चाहिए।
6. 
झंडे का यूज किसी भी प्रकार के यूनिफॉर्म या सजावट के सामान में नहीं हो सकता।
7. 
झंडे पर कुछ भी बनाना या लिखना गैरकानूनी है।
8. 
किसी भी गाड़ी के पीछे, बोट या प्लेन में तिरंगा यूज नहीं किया जा सकता है। इसका प्रयोग किसी बिल्डिंग को ढ़कने में भी नहीं किया जा सकता है।
9. 
किसी भी स्तिथि में झंडा (तिरंगा) जमीन पर टच नहीं होना चाहिए।
10. 
जब झंडा फट जाए या मैला हो जाए तो उसे एकांत में पूरा नष्ट किया जाए।
11. 
झंडा केवल राष्ट्रीय शोक के अवसर पर ही आधा झुका रहता है।
12. 
किसी भी दूसरे झंडे को राष्ट्रीय झंडे से ऊंचा या ऊपर नहीं लगा सकते और न ही बराबर रख सकते है।
13. 
जब तिरंगा फट जाए या रंग उड़ जाए तो इसे फहराया नहीं जा सकता। ऐसा करना राष्ट्रध्वज का अपमान करने वाला अपराध माना जाता है।
14. 
जब तिरंगा फट जाता है तब इसे गोपनीय तरीके से सम्मान के साथ जला दिया जाता है या पवित्र नदी में जल समाधि दे दी जाती है।
15. 
शहीदों के पार्थिव शरीर से उतारे गए झंडे को भी गोपनीय तरीके से सम्मान के साथ जला दिया जाता है या नदी में जल समाधि दी जाती है।
16. 
सबसे पहले लाल, पीले व हरे रंग की हॉरिजॉन्टल पट्टियों पर बने झंडे को 7 अगस्त 1906 को पारसी बागान चौक (ग्रीन पार्क), कोलकाता में फहराया गया था।
17. 
भारत के राष्ट्रीय ध्वज को पिंगली वैंकेया ने डिजाइन किया था।
18. 
अभी जो तिरंगा फहराया जाता है उसे 22 जुलाई 1947 को अपनाया गया था। इससे पहले इसमें 6 बार बदलाव किया गया था।
19. 3 
हिस्से से बने झंडे में सबसे ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और नीचे हरे रंग की एक बराबर पट्टियां होती है।
21. 
सफेद पट्टी के बीच में गहरे नीले रंग का एक चक्र होता है। इसका व्यास लगभग सफेद पट्टी की चौड़ाई के बराबर होता है और इसमें 24 तिलियां बनी होती हैं।
22. 22 
जुलाई 1947 से पहले तिरंगे के बीच में चक्र की जगह पर चरखा होता था। इस झंडे को 1931 में अपनाया गया था।
23. 26 
जनवरी 2002 को भारतीय ध्वज संहिता में एमेंडमेंट किया गया। इसके बाद लोगों को अपने घरों और ऑफिस में आम दिनों में तिरंगा फहराने की अनुमति मिल गई।
24. 
झारखंड की राजधानी रांची में 23 जनवरी 2016 को सबसे ऊंचा तिरंगा फहराया गया। 66*99 साइज के इस तिरंगे को जमीन से 493 फीट ऊंचाई पर फहराया गया।
25. 
राष्ट्रपति भवन के म्यूजियम में एक छोटा तिरंगा रखा हुआ है, जिसे सोने के स्तंभ पर हीरे-जवाहरातों से जड़ कर बनाया गया है।
26. 
भारत में बैंगलुरू से 420 किमी दूर स्थित हुबली एक मात्र लाइसेंस प्राप्त संस्थान है जो झंडा बनाने का और सप्लाई करने का काम करता है।
27. 29 
मई 1953 में भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा सबसे ऊंची पर्वत की चोटी माउंट एवरेस्ट पर यूनियन जैक तथा नेपाली राष्ट्रीय ध्वज के साथ फहराता नजर आया था इस समय शेरपा तेनजिंग और एडमंड माउंट हिलेरी ने एवरेस्ट फतह की थी।
28. 
पहली बार 21 अप्रैल 1996 के दिन स्क्वाड्रन लीडर संजय थापर ने तिरंगे की शान बढाते हुए एम. आई.-8 हेलिकॉप्टर से 10000 फीट की ऊंचाई से कूदकर देश के झंडे को उत्तरी ध्रुव में फहराया था।
29. 1984 
में विंग कमांडर राकेश शर्मा ने भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को लेकर अंतरिक्ष के लिए पहली उड़ान भरी थी।
30. 
दिसंबर 2014 से चेन्नई में 50,000 स्वयंसेवकों द्वारा मानव झंडा बनाने का विश्व रिकॉर्ड भी भारतीयों के पास ही है।
जय हिंद
जय भारत . .......... AMIT KATHERIYA

































         

शुक्रवार, 25 मई 2018

भारत वर्ष में धानुक समाज अलग - अलग प्रांतो में अलग - अलग नामों से जाना जाता है जिनमें कुछ प्रमुख नाम इस प्रकार हैं।....
#धानका,
#धाणका,
#धानुका,
#धनिक,
#धनवार,
#धेनुक,
#धानकया,
#धेनुधर,
#धनुधारी,
#धनुष क्षत्रिय,
#धानुष,
#धानुषराय,
#धनुवंशी,
#धनवन,
#धनवंत,
#धनन्जय,
#धनकर,
#धन्नुवंशी,
#धानकवाल,
#धनकपाल,
#धानविक,
#धाकड,
#धाकरे,
#कठ,
#कठेरिया,
#कथेरिया,,
#गोरवी,
#जुलाहे,
#वसोड,
#वर्गी,
#बरार,
#वंशकार,
#वास्को,
#साइस,
#बावन,
#महाशय,
#तडवी,
#तलवी,
आदी.।
संकलन:-धानुक दर्पण ....
AMIT KATHERIYA

शनिवार, 21 अप्रैल 2018

।। उ. प्र. में प्रचलित धानुक समाज के निम्नलिखित गोत्रों को ही अभी तक मैं सूचीबँध कर पाया हूँ ।।

1.कथरिया (कठेरिया) . 2.धोसिया  3.कछवाय  4.अत्तरोलिया  
5.नगेले   6.लचिया  7.कनेरिया  8.रितोरिया  9.रकशेले  10.भटेले 
11.तुरइयाँ   12.भिसोरिया  13.कनपुरिया  14.मूसा 
15.सौंनपूरिया  16.लोंगवर्शा  17. गडरिया     18.लोहिटा 
19.भमरोलिया  20.कंदीया  21.पडरिया  22.जनकपुरिया 
23.जुगनिया  24.बड़गइयाँ  25.अजनेरिया 
26.बंजरिया   27.बड़गोती  28- खकरपुजा  

Note - जल्द ही बाक़ी के गोत्रों की लिस्ट को भी  शेयर किया जायेगा।। 

....................................... अमित कठेरिया 

बुधवार, 7 मार्च 2018

आज मैं बिहार के कुर्मी जाति के बारे में "
सिध्देश्वर "बाबू द्वारा रचित किताब पढ़
रहा था ।
उसके अंदर पुरे बिहार मे पायी जाने वाली
कुर्मी जाति की उप जाति का नाम का
वर्णन था ।
ये बाते इस लिए लिख रहा हूँ , कि कुछ दिन
पहले अपने बिच के कुछ साथीगण अपने-अपने
ज्ञान से संख्या का आकलन कर रहे थे ।
आपकी संख्या बल इतनी है कि इसकी पूरी
जानकारी जान-बुझ कर समंतवादियो
द्वारा सर्वजनिक नहीं किया जाता है ।
कारण इसके 2 है ।
1) कुर्मी की सही संख्या बता देने के बाद
इसका मनोबल तोड़ना बहुत कठिन हो
जायेगा ?
2) कुर्मी... आज मैं बिहार के कुर्मी जाति के बारे में "
सिध्देश्वर "बाबू द्वारा रचित किताब पढ़ रहा
था ।
उसके अंदर पुरे बिहार मे पायी जाने वाली
कुर्मी जाति की उप जाति का नाम का वर्णन
था ।
ये बाते इस लिए लिख रहा हूँ , कि कुछ दिन पहले
अपने बिच के कुछ साथीगण अपने-अपने ज्ञान से
संख्या का आकलन कर रहे थे ।
आपकी संख्या बल इतनी है कि इसकी पूरी
जानकारी जान-बुझ कर समंतवादियो द्वारा
सर्वजनिक नहीं किया जाता है ।
कारण इसके 2 है ।
1) कुर्मी की सही संख्या बता देने के बाद
इसका मनोबल तोड़ना बहुत कठिन हो
जायेगा ?
2) कुर्मी की सही संख्या बता देगे , तो इनके
सामने किसी भी प्रकार से आगे नहीं निकल
सकते है ?
अब आप खुद ही देखे ,बिहार के हर जिले में कुर्मी
का कौन-कौन शाखाये है ।
1) अररिया - जयसवार ,समसवार, अमात,धानुक
।
2) औरंगाबाद- अवधिया,जयसवार,व्याहुत।
3) कटिहार -जयसवार ।
4) किशनगंज - जयसवार , धानुक ।
5)खगरिया- जयसवार ,समसवार।
6)गोपालगंज -अवधिया,जयसवार ,सैंथवार,
ढिलफोड़ा, चंदेल ,धानुक ।
7)गया - घमैला ,कोचैसा, अवधिया , जयसवार।
8)जहानाबाद -घमैला ,अवधिया ,कोचैसा
,जयसवार ।
9) जमुई - जयसवार ,समसवार ,घमैला,दोजवार ,
धानुक ।
10) दरभंगा - जयसवार,अवधिया ,समसवार, तैलंग,
चंदेल ,चनउ
11)नवादा -घमैला ,कोचैसा ,जयसवार ।
12) नालंदा - घमैला , कोचैसा ,अवधिया
,समसवार, जयसवार, धानुक ।
13)पूर्णिया -जयसवार, समसवार, अमात,धानुक,
कैवर्त,चंदेल ।
14)बेतिया - जयसवार,चंदेल,चनऊ, धानुक
,चपरिया ।
15) मोतिहारी - जयसवार, धानुक , तैलंग ।
16)बेगुसराय - जयसवार, समसवार,धानुक ।
17)- बक्सर - सैंथवार ,जयसवार,घोड़चढ़े ,चंदेल ।
18)-भभुआ - चंदेल ,जयसवार, अवधिया ,
पटनवार,घोरचढ़े ।
19)भागलपुर-चंदेल,समसवार,जयसवार, रमैया,
धानुक ,पटनवार ।
20)भोजपुर- सैंथवार ,जयसवार,अवधिया,
घोडचढ़े, चंदेल ।
21) मधुबनी- जयसवार , तैलंग,
अमात,धाम,समसवार,चंदेल ,चनउ, काइवर्त ।
22) मधेपुरा - जयसवार,समसवार, धानुक,अमात,
काइवर्त ।
23) मुजफरपुर- जयसवार ,धानुक , समसवार , तैलंग ,
चंदेल ,गुरु नानक पंथी ।
24) मुंगेर- जयसवार , समसवार ,धानुक ,घमैला
,दोजवार ।
25) रोहतास- चंदेल , जयसवार ,अवधिया ,
घोड़चढ़े , पटनवार ,गुरुनानक पंथ ।
26) वैशाली- जयसवार , समसवार , अवधिया ,
तैलंग , गुरु नानक पंथ ।
27) सीवान- जयसवार ,अवधिया , धानुक ,
डिल्फोरा ।
28) सहरसा- समसवार , जयसवार , धानुक ।
29) सुपौल - समसवार ,जयसवार , धानुक ।
30 ) सीतामढ़ी -जयसवार , तैलंग , धानुक ,चंदेल
,कईवर्त ।
31) समस्तीपुर - जयसवर , समसवार, धानुक , चंदेल
।
32) सारण -जयसवार , समसवार ,अवधिया
,धानुक ।
33) पटना - अवधिया , घमैला ,कोचैसा ,
समसवार,जयसवार ,धानुक ।(पटना शहर में सभी
शाखा के लोग बसे है ) ।
आपके बिहार में कुर्मियों की इतनी शाखा है ।
..............................................अमित कठेरिया (धानुक)

शनिवार, 27 जनवरी 2018

दुनिया के सबसे बड़े 7 डाक्टर
 
1- सुरज की किरणें 🌞
2- रोजाना रात 6/8 घंटे निंद 😴
3- शुध्द शाकाहारी भोजन 🍑
4- हररोज व्यायाम. 🏃
5- खुदपर विश्वास 😇
6- पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन
7- अच्छे दोस्त 👬👬
इन 7 बातोंको हमेशा अपने पास रखीये सभी दर्द दुर हो जायेंगे........: एक मिनट का समय निकालके अवश्य पढ़े...

सिकंदर ने आधी दुनिया जीत ली थी पर.......... 
धानुक समाज के टाइटल
॰
जब मरा तो 3 इच्छा थी..
1- जिन हकीमों ने इलाज किया वो सब जनाजे को कँधा देँ ..
॰
कयोँ ?
॰
ताकि सबको पता चल जाये कि हकीम भी मरने से रोक
नहीँ सकते .. ॰
2- जनाजे की राह मेँ दौलत बिछा दी जाये ..
॰
कयों?
॰
ताकि सब जान लेँ दौलत किसी काम नहीँ आती ..
॰
3-दोनों हाथ खाली बाहर लटकाऐ जाये ..
॰
कयों?
॰
सबको मालूम हो खाली हाथ
आए थे
खाली हाथ जाना है
सब यहीँ रह जाना है !! .....AMIT KATHERIYA
ताकत स्वीकार करने की (PowerofAcceptance) ...

1. बेटा पिता के आगे स्वीकार नहीं करता कि वो पढ़ाई में कमजोर है.
2. Employees Boss के आगे स्वीकार नहीं करता की उससे गलती हुई है.
3. बहु सास के आगे स्वीकार नहीं करती कि दाल में नमक ज्यादा पड़ गया है.
4. Student Teacher के आगे स्वीकार नहीं करता की उसकी English या Maths कमजोर है.
5. दोस्त स्वीकार नहीं करता की उसका उसकी Wife के साथ अच्छे सम्बन्ध नहीं हैं.
6. पति पत्नी आपस में स्वीकार नहीं करते कि गलती उनमें से किसी एक की है.
7. डर क्या है : अनिश्चितता को स्वीकार न करना. 
धानुक दर्पण
8. ईर्ष्या, नफ़रत क्या है : दूसरों की अच्छाई को स्वीकार न करना.
9. क्रोध क्या है : दूसरे का हमारी बात को स्वीकार न करना.
10. इस तरह की न जाने कितने ही घटनाएँ स्वीकार न करने की हमारे साथ होती रहती है.
तो मित्रों जब कोई स्वीकार ही नहीं करेगा तो समाधान कहाँ से निकलेगा, वहां तो Negativity ही Negativity का निवास होगा।
मित्रों Positive Energy तब बहेगी जब कोई स्वीकार करेगा कि हाँ हमारे अंदर कमी है या हमसे गलती हुई है.
इंसान भी जिंदगी में बड़ी बड़ी समस्याओं की वजह से परेशान नहीं हैं, हम परेशान रहते हैं रोज़ रोज़ की छोटी छोटी समस्याओं की वजह से.
इन छोटी छोटी समस्याओं का समाधान तो है जिससे ये समस्याएं हमें परेशान न करें, मित्रों उसके लिए हमारे अंदर स्वीकार(Accept) करने के ताकत होनी चाहिए।
क्या हमारे अंदर इतनी ताकत है कि हम दूसरों को उसी रूप में स्वीकार करें जैसे वे हैं और उनकी गलतियों के लिए इतनी जल्दी माफ़ कर दे ”जितनी जल्दी हम उपरवाले से अपनी गलतियों के लिए माफ़ी की उम्मीद रखते हैं" ?
किसी भी moment में "Unconditional Acceptance" का मतलब है Negativity को वहीं पर "Stop करना", Problem को "महामारी न" बनने देना.
जैसे ऊपर वाले सारे Examples को एक बार फिर देखते हैं :-
1. क्या हुआ अगर कोई पढ़ाई में कमजोर है ? Concept clear न होने पर हर कोई कमजोर ही होता है. बेटे के स्वीकार करने पर दोनों पिता और पुत्र पढ़ाई का कोई नया तरीका अपनाते.
2. क्या हुआ अगर गलती हो गयी ? Employee के स्वीकार करने पर Boss भी उस employees को उसके level का काम देता और employee भी अपनी Knowledge increase करने का प्रयास करता.
3. क्या हुआ अगर खाना ख़राब बन गया ? इंसान से गलतियां होती रहती है. बहु के स्वीकार करने से सब जगह शांति हो जाती.
4. Student के स्वीकार करने पर दोनों Teacher और Student पढ़ाई का कोई नया तरीका ईजाद करते.
5. Problem solve करने के लिए दोस्त ही कोई तरीका बताता.
6. अपनी अपनी गलती मान लेने से दोनों अपनी Future planning पर ध्यान देते.
7. अगर हम अनिश्चितता को ही स्वीकार कर लें तो फिर डर काहे का.
8. जिस तरह नमक और चीनी के mixture में से चीटीं सिर्फ अपने काम की चीज चीनी उठाती है, उसी तरह दूसरे इंसान की अच्छाइयां उठाते ही उससे ईर्ष्या, नफ़रत सब ख़त्म हो जाती है.
9. दूसरे की सहनशीलता देखते ही, काहे का क्रोध।
मित्रों अपनी "गलती स्वीकार न करना एक बीमारी" है और ये एक ऐसी बीमारी है जिसमें आदमी खुद तो परेशान रहता ही रहता है, उससे जुड़े दूसरे लोग भी बहुत परेशान रहते हैं. हमें जिंदगी में किसी को हराने के लिए ताकत दिखाने के बजाये, अपनी "स्वीकार करने की ताकत" दिखाते और बढ़ाते हुए अपने को निखारना ही होगा.
मित्रों ध्यान रहे जो बीत गया उस पर कभी भी पछतावा न करें क्योँकि "जब आपने वो काम किया था तब आप उसे करना चाहते थे", फिर पछतावा किस बात का. अब तो बारी है कि अगर कुछ गलत हो गया है उसको "स्वीकार करके" दुरुस्त किया जाये।
स्वीकार न करके हम अपने आस पास एक Negative Aura (प्रभामण्डल) तैयार कर लेते है और फिर जिंदगी भर उस Negative Aura से बाहर आने की ही जद्दोजहत में जिंदगी गुजार देते हैं.
हमें "Accept करने की ताकत" को समझना पड़ेगा।
अपनी गलतियों को Accept न करने का मतलब है कि अपने मोबाइल की contact memory का उन पुराने बेकार contact नंबरों से भर जाना, जिनका आज की date में कोई लेना देना नहीं है. मित्रों जब तक वो पुराने नम्बर हम delete नहीं करेंगे तब तक नए नम्बर save करने के लिए जगह नहीं बनेगी.
इसी तरह अपनी जिंदगी से भी हमें ऐसे पुराने हादसों को माफ़ी मांग कर या माफ़ करके delete करना पड़ेगा तभी हम नई खुशनुमा यादों के लिए जगह बना पाएंगे क्योँकि पुरानी गलतफमियों को अभी तक हमने "स्वीकार न" करके संभाल कर रखा है. हमें उन पुरानी गलतफमियों को "स्वीकार कर" उन्हें delete करके Positivity के Aura में कदम रखना ही होगा.

मित्रों, अगर जींदगी मे कुछ पाना हो. तो .... तरीके बदलो.. ईरादे नही

.....AMIT KATHERIYA

https://katheriyadhanuksamaj.blogspot.in

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